राजस्थान के स्कूलों में सुरक्षा पर बड़ा फैसला, 12,335 करोड़ की कार्ययोजना

राजस्थान स्कूलों की सुरक्षा के लिए 12,335 करोड़ की कार्ययोजना, मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास के निर्देश

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राजस्थान में स्कूल आधारभूत संरचना को मजबूत करने के लिए 12,335.90 करोड़ रुपये की कार्ययोजना प्रस्तावित, 65 हजार से अधिक सरकारी स्कूलों का तकनीकी सर्वेक्षण

 विद्यार्थियों की सुरक्षा और स्कूलों में बेहतर आधारभूत सुविधाएं सुनिश्चित करने को लेकर राजस्थान सरकार ने व्यापक स्तर पर कार्रवाई शुरू कर दी है। मुख्य सचिव श्री वी. श्रीनिवास की अध्यक्षता में मंगलवार को शासन सचिवालय में राजस्थान उच्च न्यायालय, जयपुर पीठ के निर्देशों की अनुपालना को लेकर उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में प्रदेश के शिक्षण संस्थानों में सुरक्षित भवन, स्वच्छ शौचालय, स्वच्छता और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं की विभागवार प्रगति की समीक्षा की गई।

मुख्य सचिव श्री वी. श्रीनिवास ने स्पष्ट कहा कि विद्यार्थियों की सुरक्षा राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसी भी जर्जर अथवा असुरक्षित विद्यालय भवन या कक्षा-कक्ष का उपयोग नहीं किया जाए। विद्यार्थियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए विद्यालय भवनों की नियमित जांच, मरम्मत, पुनर्निर्माण और सुरक्षा संबंधी कार्यों की लगातार मॉनिटरिंग की जाए।

जर्जर भवनों का उपयोग नहीं करने के निर्देश

समीक्षा बैठक में स्कूल भवनों की सुरक्षा को विशेष महत्व दिया गया। मुख्य सचिव ने संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ समयबद्ध तरीके से कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिन विद्यालय भवनों या कक्षा-कक्षों को तकनीकी रूप से असुरक्षित अथवा जर्जर पाया गया है, वहां विद्यार्थियों की पढ़ाई के लिए सुरक्षित वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

सरकार की ओर से विद्यालय भवनों की स्थिति का तकनीकी सर्वेक्षण भी कराया गया है। अतिरिक्त मुख्य सचिव, स्कूल शिक्षा श्री राजेश यादव ने बैठक में बताया कि प्रदेश के 65 हजार 308 राजकीय विद्यालयों का तकनीकी सर्वेक्षण कराया गया है। इस सर्वेक्षण के दौरान 3 हजार 768 जर्जर विद्यालय भवन और 83 हजार 783 जर्जर कक्षा-कक्ष चिन्हित किए गए हैं।

विद्यार्थियों की सुरक्षा को देखते हुए इन जर्जर भवनों और कक्षा-कक्षों के उपयोग पर रोक लगाई गई है। प्रभावित विद्यालयों में विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए सुरक्षित वैकल्पिक व्यवस्थाएं किए जाने की जानकारी भी बैठक में दी गई।

स्कूल इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए 12,335.90 करोड़ की कार्ययोजना

राजस्थान सरकार ने स्कूल आधारभूत संरचना के सुदृढ़ीकरण के लिए बड़े स्तर पर वित्तीय प्रावधान की योजना तैयार की है। वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक स्कूल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए कुल 12 हजार 335.90 करोड़ रुपये की कार्ययोजना प्रस्तावित की गई है।

इस कार्ययोजना के तहत नए विद्यालय भवनों के निर्माण से लेकर जर्जर कक्षा-कक्षों और शौचालयों के पुनर्निर्माण तथा विद्यालयों की वृहद मरम्मत तक के कार्य शामिल किए गए हैं।

प्रस्तावित कार्ययोजना के अनुसार:

  • 3 हजार 587 नए विद्यालय भवनों के निर्माण के लिए 2 हजार 487.75 करोड़ रुपये प्रस्तावित हैं।
  • 22 हजार 589 विद्यालयों की वृहद मरम्मत के लिए 1 हजार 129.45 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
  • 83 हजार 783 जर्जर कक्षा-कक्षों के स्थान पर नए कक्षा-कक्षों के निर्माण के लिए 8 हजार 378.30 करोड़ रुपये प्रस्तावित हैं।
  • 13 हजार 616 जर्जर शौचालयों के पुनर्निर्माण के लिए 340.40 करोड़ रुपये का प्रावधान प्रस्तावित है।

इसके अलावा, चालू वर्ष में स्कूल आधारभूत संरचना के सुदृढ़ीकरण पर 3 हजार करोड़ रुपये का निवेश किए जाने की जानकारी दी गई।

पेयजल और स्वच्छ शौचालयों पर विशेष जोर

मुख्य सचिव ने विद्यालयों में पेयजल व्यवस्था को लेकर भी अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश का कोई भी विद्यालय पेयजल सुविधा से वंचित नहीं रहना चाहिए। प्रत्येक विद्यालय में नल कनेक्शन अथवा समुचित वैकल्पिक पेयजल व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए।

उन्होंने पेयजल की गुणवत्ता की नियमित जांच सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया। इसके साथ ही विद्यालयों में पर्याप्त संख्या में स्वच्छ शौचालय, उनकी नियमित सफाई एवं रखरखाव तथा उचित जल निकासी की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

मुख्य सचिव ने कहा कि विद्यार्थियों के लिए सुरक्षित और स्वच्छ वातावरण उपलब्ध कराना केवल भवन निर्माण तक सीमित विषय नहीं है। स्कूलों में साफ-सफाई, स्वच्छ पेयजल और उपयोग योग्य शौचालय भी विद्यार्थियों के स्वास्थ्य एवं सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण के लिए आवश्यक हैं।

कॉलेज और अन्य शिक्षण संस्थान भी समीक्षा के दायरे में

समीक्षा के दौरान केवल राजकीय विद्यालयों ही नहीं, बल्कि उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा, चिकित्सा एवं अन्य शिक्षण संस्थानों में भी मूलभूत सुविधाओं की स्थिति पर ध्यान देने के निर्देश दिए गए।

मुख्य सचिव ने चिकित्सा, तकनीकी और उच्च शिक्षण संस्थानों सहित निजी एवं मेडिकल कॉलेजों में भी पर्याप्त एवं स्वच्छ शौचालय, पेयजल तथा स्वच्छता सुविधाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

विद्यालयों और उच्च शिक्षा संस्थानों की सुरक्षा की सतत निगरानी के लिए संयुक्त निदेशकों को नियमित निरीक्षण करने तथा शाला दर्पण पोर्टल पर स्थिति अद्यतन करने के निर्देश दिए गए हैं।

संभाग स्तर पर नोडल अधिकारी करेंगे निगरानी

स्कूल सुरक्षा, बाल संरक्षण और जर्जर भवनों की स्थिति की नियमित निगरानी के लिए संभाग स्तर पर प्रशासनिक अधिकारियों को नोडल अधिकारी बनाया गया है। ये अधिकारी विद्यालयों की स्थिति की नियमित समीक्षा करेंगे और प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे।

इसके साथ ही ग्राम पंचायतों के माध्यम से राजकीय विद्यालयों में नियमित साफ-सफाई और स्वच्छता सुनिश्चित करने के लिए भी आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। इससे स्कूलों में स्थानीय स्तर पर स्वच्छता व्यवस्था को बेहतर बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

IIT जोधपुर और MNIT जयपुर के विशेषज्ञों से तकनीकी जांच

राजकीय विद्यालय भवनों की स्वतंत्र तकनीकी सुरक्षा जांच के लिए आईआईटी जोधपुर और एमएनआईटी जयपुर के सिविल इंजीनियरिंग विशेषज्ञों की समिति गठित की गई है। बैठक में बताया गया कि आईआईटी जोधपुर की रिपोर्ट एवं अनुशंसाएं प्राप्त हो चुकी हैं, जबकि एमएनआईटी जयपुर की रिपोर्ट अपेक्षित है।

विद्यालय भवनों के निर्माण, पुनर्निर्माण और मरम्मत में राष्ट्रीय भवन संहिता, एनसीपीसीआर के स्कूल सुरक्षा दिशा-निर्देश, बीआईएस मानकों तथा अन्य निर्धारित तकनीकी मानकों की पालना सुनिश्चित की जा रही है।

न्यायालय के निर्देशों की बिंदुवार अनुपालना पर जोर

मुख्य सचिव ने सभी संबंधित विभागों को राजस्थान उच्च न्यायालय के निर्देशों की तथ्यात्मक और बिंदुवार अनुपालना सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सभी विभाग अद्यतन आंकड़ों के आधार पर समेकित प्रगति रिपोर्ट तैयार रखें और शेष कार्यों को निर्धारित समय-सीमा में पूरा करें।

बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव, उच्च एवं तकनीकी शिक्षा श्री कुलदीप रांका, प्रमुख शासन सचिव, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य श्रीमती गायत्री ए. राठौड़ सहित जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग और अन्य संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

राज्य सरकार की प्रस्तावित कार्ययोजना से आने वाले वर्षों में स्कूलों की आधारभूत संरचना को मजबूत करने, जर्जर भवनों एवं कक्षा-कक्षों के स्थान पर सुरक्षित सुविधाएं विकसित करने तथा विद्यार्थियों को स्वच्छ पेयजल एवं बेहतर स्वच्छता सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठने की उम्मीद है।

GOLDEN HIND DESK