एग्रो क्लस्टर्स से बढ़ेगा निवेश और निर्यात

राजस्थान में एग्रो-प्रोसेसिंग क्लस्टर्स की मैपिंग, निर्यात और निवेश पर जोर

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एग्रो-प्रोसेसिंग क्लस्टर्स की विस्तृत मैपिंग करें, निर्यात और निवेश संभावनाएं चिन्हित करें: मुख्य सचिव कृषि उपज को प्रसंस्करण और बाजार से जोड़कर किसानों को दिलाएं बेहतर मूल्य

राजस्थान फूड पार्क डेवलपमेंट पॉलिसी-2026 के तहत 39 फूड पार्क प्रस्तावित, 35 स्थानों पर भूमि आवंटित

 मुख्य सचिव श्री वी. श्रीनिवास ने प्रदेश में कृषि उपज को प्रसंस्करण, बाजार और निर्यात से प्रभावी रूप से जोड़ते हुए किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य दिलाने पर जोर दिया है। उन्होंने प्रस्तावित एग्रो-प्रोसेसिंग क्लस्टर्स की फसल एवं क्षेत्रवार विस्तृत मैपिंग कर उनकी आर्थिक, निवेश और निर्यात संभावनाओं को चिन्हित करने के निर्देश दिए हैं।

मुख्य सचिव बुधवार को शासन सचिवालय में एग्रो-प्रोसेसिंग क्लस्टर्स के विकास को लेकर आयोजित हितधारकों की बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। उन्होंने कहा कि एग्रो-प्रोसेसिंग क्लस्टर्स को केवल उत्पादन और प्रसंस्करण तक सीमित नहीं रखा जाए, बल्कि खेत से बाजार तक पूरी मूल्य श्रृंखला को मजबूत किया जाए।

उन्होंने क्लस्टर्स में छंटाई एवं श्रेणीकरण, पैकेजिंग, शीत भंडारण, प्रसंस्करण, परिवहन एवं आपूर्ति व्यवस्था, ब्रांड निर्माण और बाजार से जुड़ाव जैसी सुविधाएं विकसित करने पर जोर दिया। इससे फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करने के साथ किसानों को बेहतर बाजार और बेहतर मूल्य उपलब्ध कराया जा सकेगा।

एफपीओ की मैपिंग और ठोस कार्ययोजना के निर्देश

श्री श्रीनिवास ने नाबार्ड को प्रस्तावित क्लस्टर्स की आर्थिक संभावनाओं के साथ किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) की मैपिंग करने के निर्देश दिए। संबंधित विभागों को आगामी समीक्षा बैठक में क्लस्टरवार विस्तृत एवं क्रियान्वयन योग्य कार्ययोजना प्रस्तुत करने को कहा गया।

उन्होंने नव उद्यमों, सूक्ष्म प्रसंस्करण इकाइयों और निजी क्षेत्र को भी इस पहल से जोड़ने पर जोर दिया। साथ ही केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं के बेहतर समन्वय से उपलब्ध संसाधनों एवं सहायता का अधिकतम लाभ उठाने की बात कही।

कृषि उत्पादों के निर्यात पर विशेष फोकस

अतिरिक्त मुख्य सचिव, उद्योग श्री शिखर अग्रवाल ने प्रदेश में बड़े कृषि प्रसंस्करण उद्यमों को आकर्षित करने तथा कृषि उत्पादों के मूल्य संवर्धन और निर्यात की संभावनाओं पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता बताई।

उन्होंने प्रमुख निर्यात योग्य कृषि उत्पादों और उनके संभावित बाजारों को चिन्हित करने तथा एग्रो-प्रोसेसिंग क्लस्टर्स को फूड पार्कों के साथ-साथ राज्य की औद्योगिक एवं निवेश प्रोत्साहन नीतियों से जोड़ने पर जोर दिया।

इससे निजी निवेश को बढ़ावा मिलने के साथ राजस्थान के कृषि उत्पादों की राष्ट्रीय और वैश्विक बाजारों तक पहुंच बढ़ाने में मदद मिलेगी।

39 फूड पार्क प्रस्तावित, 35 स्थानों पर भूमि आवंटित

प्रमुख शासन सचिव, कृषि एवं उद्यानिकी श्रीमती मंजू राजपाल ने बताया कि राजस्थान फूड पार्क डेवलपमेंट पॉलिसी-2026 के तहत प्रदेश में 39 फूड पार्क प्रस्तावित हैं। इनमें से 35 स्थानों पर भूमि आवंटित की जा चुकी है।

उन्होंने बताया कि प्रदेश में वर्तमान में कृषि प्रसंस्करण से संबंधित आधारभूत ढांचे के तहत—

  • 2 मेगा फूड पार्क

  • 4 एग्रो-प्रोसेसिंग क्लस्टर्स

  • 6 रीको/स्पाइस पार्क

उपलब्ध हैं। इसके अलावा प्रदेश में 1,500 से अधिक एग्रो-प्रोसेसिंग इकाइयां संचालित हैं। प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन (PMFME) योजना के तहत 1,850 से अधिक सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों को भी सहायता दी गई है।

10 प्रमुख फसलों पर आधारित क्लस्टर्स विकसित होंगे

कृषि एवं उद्यानिकी विभाग के अनुसार मूंग, सरसों, सोयाबीन, किन्नू, अनार, अमरूद, संतरा, इसबगोल, जीरा और लहसुन पर आधारित 10 एग्रो-प्रोसेसिंग क्लस्टर्स विकसित करने की दिशा में काम किया जा रहा है।

इन क्लस्टर्स के लिए प्रमुख उत्पादन क्षेत्रों की फसल एवं जिलेवार मैपिंग की गई है। इसका उद्देश्य उत्पादन वाले क्षेत्रों को प्रसंस्करण सुविधाओं और बाजार से प्रभावी ढंग से जोड़ना है।

7 क्लस्टर्स राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड के कार्यक्रम के तहत पात्र

उद्यानिकी आयुक्त श्रीमती श्वेता चौहान ने बताया कि प्रस्तावित 10 क्लस्टर्स में से 7 क्लस्टर्स राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड के क्लस्टर विकास कार्यक्रम (CDP 2.0) के तहत पात्र हैं।

अमरूद, अनार और जीरा के तीन क्लस्टर्स के अवधारणा प्रस्ताव प्रस्तुत किए जा चुके हैं। वहीं इसबगोल, किन्नू, लहसुन और संतरा के चार क्लस्टर्स को आगामी चरण में प्रस्तावित किया जाना है।

सरसों, सोयाबीन और मूंग आधारित क्लस्टर्स को फूड पार्क, निवेश समझौतों तथा राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं के माध्यम से आगे बढ़ाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।

बैठक में विभिन्न विभागों और विशेषज्ञों ने लिया भाग

बैठक में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय, भारत सरकार, उद्योग एवं वाणिज्य, वित्त, कृषि एवं उद्यानिकी विभाग, राजस्थान राज्य कृषि विपणन बोर्ड, राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड, नाबार्ड, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के विभिन्न संस्थानों, चौधरी चरण सिंह राष्ट्रीय कृषि विपणन संस्थान तथा प्रदेश के कृषि विश्वविद्यालयों के अधिकारियों एवं विशेषज्ञों ने भाग लिया।

बैठक में कृषि प्रसंस्करण क्षेत्र से जुड़े निवेशक और प्रगतिशील कृषक भी मौजूद रहे।

किसानों को बेहतर मूल्य दिलाने पर फोकस

राज्य सरकार का फोकस कृषि उपज को केवल उत्पादन स्तर तक सीमित रखने के बजाय उसे प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन, ब्रांडिंग, बाजार और निर्यात से जोड़ने पर है। एग्रो-प्रोसेसिंग क्लस्टर्स के माध्यम से किसानों को स्थानीय स्तर पर प्रसंस्करण सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच बढ़ाने की दिशा में काम किया जा रहा है।

GOLDEN HIND DESK