SGVU में करीब 300 छात्रों की डिग्री रोकने का आरोप, ABVP के समर्थन से यूनिवर्सिटी के बाहर धरना फीस विवाद और 1.30 करोड़ रुपये के कथित गबन को लेकर छात्रों ने उठाए सवाल, मूल डिग्री और दस्तावेज जारी करने की मांग
सुरेश ज्ञान विहार यूनिवर्सिटी (SGVU) में करीब 300 छात्रों की मूल डिग्रियां और अकादमिक दस्तावेज कथित तौर पर रोके जाने का मामला सामने आया है। छात्रों का आरोप है कि फीस जमा करने के बावजूद यूनिवर्सिटी प्रशासन की ओर से उनकी डिग्री और अन्य जरूरी दस्तावेज जारी नहीं किए जा रहे हैं। इस मामले को लेकर छात्रों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। छात्रों ने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) और विभिन्न सामाजिक संगठनों के समर्थन से यूनिवर्सिटी परिसर के सामने धरना शुरू कर दिया है।
छात्रों की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में यूनिवर्सिटी प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। छात्रों ने पूरे मामले में प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा है कि फीस से जुड़े विवाद का खामियाजा उन विद्यार्थियों को भुगतना पड़ रहा है, जिन्होंने अपने स्तर पर फीस का भुगतान किया था। छात्रों ने मांग की है कि उनकी मूल डिग्रियां और अकादमिक दस्तावेज बिना किसी अतिरिक्त शर्त के जारी किए जाएं।
2020 से 2025 तक फीस जमा करने का दावा
प्रेस विज्ञप्ति में पीड़ित छात्रों की ओर से बताया गया है कि उन्होंने वर्ष 2020 से 2025 के बीच यूनिवर्सिटी के काउंटर पर अपनी फीस जमा की थी। छात्रों का कहना है कि फीस जमा करने के बाद उन्हें अधिकृत रसीदें भी दी गई थीं। इसके अलावा कई छात्रों के पास पेमेंट ट्रांसफर से जुड़े स्क्रीनशॉट भी मौजूद होने का दावा किया गया है।
छात्रों के अनुसार, फीस भुगतान के इन दस्तावेजों के बावजूद अब उनसे दोबारा भुगतान करने के लिए कहा जा रहा है। छात्रों का कहना है कि उन्होंने जब यूनिवर्सिटी प्रबंधन के सामने अपनी रसीदें और भुगतान से जुड़े प्रमाण रखे तो भी उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ।
छात्रों ने आरोप लगाया है कि इस विवाद के चलते उनकी पढ़ाई और करियर पर भी असर पड़ रहा है। डिग्री और अन्य दस्तावेज नौकरी, उच्च शिक्षा तथा अन्य शैक्षणिक प्रक्रियाओं में जरूरी होते हैं। ऐसे में दस्तावेज रोके जाने से छात्रों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
अकाउंटेंट पर 1.30 करोड़ रुपये के कथित गबन का आरोप
प्रेस विज्ञप्ति में दस्तावेजों का हवाला देते हुए कहा गया है कि यूनिवर्सिटी ने अगस्त 2025 में रामनगरिया थाने में अपने तत्कालीन अकाउंटेंट शुभम गौड़ के खिलाफ करीब 1.30 करोड़ रुपये के कथित गबन को लेकर एफआईआर दर्ज कराई थी।
छात्रों का आरोप है कि अकाउंटेंट से जुड़े इस विवाद का असर अब उन विद्यार्थियों पर पड़ रहा है, जिन्होंने यूनिवर्सिटी को फीस का भुगतान किया था। छात्रों का कहना है कि यदि यूनिवर्सिटी के स्तर पर अकाउंट संबंधी गड़बड़ी हुई है तो उसका जिम्मेदार विद्यार्थियों को नहीं बनाया जाना चाहिए।
छात्रों ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और यह स्पष्ट करने की मांग की है कि फीस के रूप में विद्यार्थियों से प्राप्त रकम का रिकॉर्ड यूनिवर्सिटी के पास किस रूप में मौजूद है।
20 लाख रुपये के कथित समझौते पर भी सवाल
छात्रों की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में दावा किया गया है कि वर्ष 2026 में कथित तौर पर 20 लाख रुपये में समझौता किया गया। छात्रों ने इस कथित समझौते को लेकर भी सवाल उठाए हैं।
छात्रों का कहना है कि यदि मामले में समझौते के दौरान यह तय किया गया था कि विद्यार्थियों से दोबारा राशि नहीं ली जाएगी, तो अब छात्रों से लाखों रुपये की मांग किस आधार पर की जा रही है। प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने इस मामले में यूनिवर्सिटी प्रशासन से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।
उनका कहना है कि छात्रों के पास फीस जमा करने से संबंधित दस्तावेज मौजूद हैं और इन दस्तावेजों की जांच करके वास्तविक स्थिति सामने लाई जानी चाहिए।
एडमिट कार्ड रोकने का भी लगाया आरोप
छात्रों की ओर से जारी बयान में यह भी आरोप लगाया गया है कि फीस विवाद को लेकर परीक्षा से महज 24 घंटे पहले एडमिट कार्ड रोकने की धमकी देकर विद्यार्थियों पर दबाव बनाया गया।
छात्रों का दावा है कि तत्कालीन अकाउंटेंट शुभम गौड़ ने सर्वर डाउन होने का हवाला देते हुए कुछ छात्रों से ऑफलाइन फीस ली थी। बाद में जब भुगतान को लेकर विवाद सामने आया तो छात्रों से स्टांप पेपर पर एग्रीमेंट साइन कराने की बात कही गई।
छात्रों ने इसे लेकर सवाल उठाते हुए कहा है कि यदि विद्यार्थियों ने निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार फीस जमा की थी और उनके पास रसीदें मौजूद हैं, तो उन्हें दोबारा भुगतान के लिए बाध्य क्यों किया जा रहा है।
उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारियों से मुलाकात
मामले को लेकर छात्रों और मीडिया प्रतिनिधियों के सचिवालय स्थित उच्च शिक्षा विभाग पहुंचने की बात भी प्रेस विज्ञप्ति में कही गई है। छात्रों के अनुसार, उन्होंने उच्च शिक्षा विभाग के संयुक्त सचिव श्री मुकेश शर्मा से मुलाकात कर अपनी समस्या बताई।
छात्रों का दावा है कि संयुक्त सचिव की ओर से यूनिवर्सिटी प्रबंधन को मामले में तत्काल कार्रवाई करने और मीडिया के सामने आधिकारिक पक्ष रखने के निर्देश दिए गए।
हालांकि, छात्रों की प्रेस विज्ञप्ति में आरोप लगाया गया है कि यूनिवर्सिटी के सहायक कुलसचिव श्री महेंद्र शर्मा ने कई घंटे इंतजार करने के बाद भी कैमरे के सामने यूनिवर्सिटी का आधिकारिक पक्ष रखने से इनकार कर दिया।
इसको लेकर छात्रों ने यूनिवर्सिटी प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं।
मूल डिग्री जारी करने की मांग
छात्रों का मुख्य मुद्दा उनकी मूल डिग्री और अन्य अकादमिक दस्तावेजों को लेकर है। प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थियों का कहना है कि फीस विवाद या प्रशासनिक विवाद के कारण उनकी शिक्षा से जुड़े मूल दस्तावेजों को रोकना उनके भविष्य पर असर डाल सकता है।
प्रेस विज्ञप्ति में छात्रों ने UGC Regulations 2018 और राजस्थान हाईकोर्ट के इशिता गुप्ता बनाम जेएनयू, 2025 मामले का हवाला देते हुए कहा है कि फीस विवाद के नाम पर छात्रों की मूल डिग्री या दस्तावेज रोकने के मामले में नियमों का पालन किया जाना चाहिए।
छात्रों ने मांग की है कि उनकी मूल डिग्रियां और संबंधित दस्तावेज तत्काल उपलब्ध कराए जाएं। इसके साथ ही फीस भुगतान और अकाउंट से जुड़े पूरे मामले की जांच कर वास्तविक स्थिति सार्वजनिक करने की मांग भी की गई है।
आंदोलन जारी रखने की चेतावनी
छात्रों ने कहा है कि वे अपनी मांगों को लेकर आंदोलन जारी रखेंगे। उनका कहना है कि जब तक छात्रों की मूल डिग्रियां बिना शर्त जारी नहीं की जातीं और फीस विवाद को लेकर स्पष्ट समाधान नहीं किया जाता, तब तक धरना जारी रहेगा।
छात्रों ने यूनिवर्सिटी प्रशासन और संबंधित विभागों से मामले में जल्द हस्तक्षेप करने की मांग की है। उनका कहना है कि विवाद का समाधान बातचीत और दस्तावेजों की जांच के आधार पर किया जाना चाहिए, ताकि विद्यार्थियों का भविष्य प्रभावित न हो।
वहीं, इस पूरे मामले में यूनिवर्सिटी प्रशासन का विस्तृत पक्ष सामने आना अभी बाकी है। छात्रों द्वारा लगाए गए 1.30 करोड़ रुपये के कथित गबन, 20 लाख रुपये के कथित समझौते, फीस वसूली और डिग्री रोकने जैसे आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस सामग्री में नहीं हुई है। यूनिवर्सिटी या संबंधित अधिकारियों की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया मिलने के बाद मामले की तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।
छात्रों की प्रमुख मांगें
- छात्रों की मूल डिग्री और अकादमिक दस्तावेज जारी किए जाएं।
- फीस भुगतान से जुड़े रिकॉर्ड की जांच की जाए।
- छात्रों से दोबारा फीस मांगने के आधार को स्पष्ट किया जाए।
- कथित वित्तीय अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच हो।
- फीस विवाद के कारण विद्यार्थियों की परीक्षा और करियर प्रभावित न हो।
- यूनिवर्सिटी प्रशासन अपना आधिकारिक पक्ष सार्वजनिक करे।
- संबंधित विभाग मामले में हस्तक्षेप कर छात्रों की समस्या का समाधान कराए।