पंचायत चुनाव: जयपुर में निषेधाज्ञा लागू

जयपुर में पंचायत चुनाव को लेकर निषेधाज्ञा लागू: हथियार, जुलूस-सभा और भड़काऊ प्रचार पर रोक

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जयपुर में पंचायत चुनाव को लेकर निषेधाज्ञा लागू: हथियार रखने, जुलूस-सभा और भड़काऊ प्रचार पर रोक; सोशल मीडिया पर भी रहेगी नजर

 पंचायतीराज संस्थाओं के चुनाव शांतिपूर्ण, स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से कराने के लिए जयपुर जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में प्रशासन ने प्रतिबंधात्मक आदेश लागू किए हैं। जिला मजिस्ट्रेट जयपुर संदेश नायक ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) 2023 की धारा 163 के तहत यह आदेश जारी किया है।

यह आदेश 3 अक्टूबर 2026 की मध्यरात्रि से तत्काल प्रभाव से लागू होकर आगामी आदेश तक प्रभावी रहेगा। इसके तहत हथियार लेकर चलने, बिना अनुमति राजनीतिक जुलूस, सभा, धरना और भाषण आयोजित करने, भड़काऊ प्रचार करने तथा सार्वजनिक एवं निजी संपत्तियों पर बिना अनुमति चुनावी सामग्री लगाने पर रोक लगाई गई है।

यह निषेधाज्ञा जयपुर पुलिस आयुक्तालय क्षेत्र को छोड़कर जिला प्रशासन जयपुर ग्रामीण तथा कोटपूतली-बहरोड़ के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों में लागू होगी।

हथियार लेकर चलने पर प्रतिबंध

प्रशासन के आदेश के अनुसार कोई भी व्यक्ति विस्फोटक, रासायनिक पदार्थ, आग्नेयास्त्र या अन्य प्रतिबंधित हथियार लेकर यात्रा नहीं कर सकेगा। रिवॉल्वर, पिस्टल, बंदूक, एमएल गन, डीएल गन सहित गंडासा, फरसा, तलवार, भाला, कृपाण, चाकू, छुरी, कटार, बरछी और अन्य धारदार हथियारों को लेकर चलने, रखने या सार्वजनिक रूप से प्रदर्शन करने पर प्रतिबंध रहेगा।

हालांकि, चुनाव ड्यूटी में तैनात अधिकारियों-कर्मचारियों, पुलिस, राजस्थान सशस्त्र पुलिस बल, अर्द्धसैनिक बल, होमगार्ड और अन्य अधिकृत सुरक्षा बलों पर यह प्रतिबंध लागू नहीं होगा।

धार्मिक परंपराओं के अनुसार निर्धारित शस्त्र रखने की अनुमति रहेगी। इसी तरह शस्त्र लाइसेंस के नवीनीकरण, निरीक्षण या पुलिस थाने में हथियार जमा कराने के लिए जाने वाले लोगों को भी आदेश में निर्धारित छूट दी गई है।

दिव्यांग और ऐसे बीमार व्यक्ति जो बिना लाठी या बैसाखी के सहारे नहीं चल सकते, वे आवागमन के लिए इनका उपयोग कर सकेंगे। राष्ट्रीय राइफल एसोसिएशन के प्रतियोगिता की तैयारी अथवा प्रतियोगिता में भाग लेने वाले सदस्यों को भी निर्धारित छूट दी गई है।

बिना अनुमति जुलूस और सभा पर रोक

राजनीतिक उद्देश्य से किसी भी सार्वजनिक स्थान पर जुलूस, सभा, धरना, भाषण या अन्य कार्यक्रम आयोजित करने के लिए संबंधित उपखंड मजिस्ट्रेट की पूर्व अनुमति जरूरी होगी।

प्रशासन की अनुमति के बिना ध्वनि प्रसारण यंत्र, लाउडस्पीकर या अन्य प्रचार उपकरणों का इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा। अनुमति मिलने पर ध्वनि प्रसारण यंत्रों का उपयोग सुबह 6 बजे से रात 10 बजे तक किया जा सकेगा।

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि किसी भी राजनीतिक कार्यक्रम के दौरान ऐसा कोई कार्य नहीं किया जाए, जिससे कानून व्यवस्था या जनशांति प्रभावित होने की आशंका हो। हालांकि, बारात और शवयात्रा को इस प्रतिबंध से बाहर रखा गया है।

भड़काऊ नारे और प्रचार सामग्री पर भी रोक

निषेधाज्ञा के दौरान भाषायी, जातीय या साम्प्रदायिक सद्भावना को नुकसान पहुंचाने वाले नारे लगाने पर रोक रहेगी। इसके अलावा किसी व्यक्ति को भड़काने वाला भाषण या उद्बोधन देने तथा ऐसी सामग्री को प्रकाशित या वितरित करने पर भी प्रतिबंध रहेगा।

भड़काऊ या विवाद पैदा करने वाली सामग्री वाले पोस्टर, पंपलेट और अन्य चुनावी प्रचार सामग्री को छापने, छपवाने या बांटने पर कार्रवाई की जा सकती है।

प्रशासन ने इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के जरिए भी इस तरह के प्रचार पर रोक लगाई है। इनमें एम्पलीफायर, रेडियो, टेप रिकॉर्डर, लाउडस्पीकर, ऑडियो-वीडियो उपकरण और अन्य इलेक्ट्रॉनिक माध्यम शामिल हैं।

सोशल मीडिया पर भी रहेगी नजर

पंचायत चुनाव के दौरान सोशल मीडिया के इस्तेमाल को लेकर भी प्रशासन ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं। Facebook, X (Twitter), WhatsApp, YouTube और Instagram जैसे प्लेटफॉर्म पर धार्मिक उन्माद, जातिगत द्वेष या दुष्प्रचार फैलाने वाली सामग्री का प्रसार नहीं किया जा सकेगा।

चुनाव के दौरान सोशल मीडिया पर किसी समुदाय, जाति या वर्ग के खिलाफ आपत्तिजनक या भड़काऊ सामग्री पोस्ट करने, शेयर करने अथवा प्रचारित करने पर कार्रवाई की जा सकती है।

सार्वजनिक संपत्ति पर पोस्टर-बैनर लगाने पर रोक

किसी उम्मीदवार या राजनीतिक दल के समर्थन अथवा विरोध में सार्वजनिक और राजकीय संपत्तियों पर नारे लिखने, चित्र बनाने या पोस्टर-होर्डिंग लगाने की अनुमति नहीं होगी।

सार्वजनिक संपत्ति का चुनावी विज्ञापन के रूप में इस्तेमाल भी प्रतिबंधित रहेगा। निजी संपत्ति पर चुनावी पोस्टर, बैनर या अन्य प्रचार सामग्री लगाने के लिए संबंधित संपत्ति मालिक की लिखित पूर्व अनुमति आवश्यक होगी।

धार्मिक स्थलों और चिकित्सा संस्थानों का चुनावी इस्तेमाल नहीं

चुनाव प्रचार के दौरान मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा, गिरजाघर या किसी अन्य पूजा स्थल को चुनावी प्रचार मंच के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा।

इसी तरह चिकित्सा संस्थानों का उपयोग भी चुनाव प्रचार के लिए नहीं किया जाएगा। प्रशासन का उद्देश्य चुनाव प्रचार को शांतिपूर्ण और निष्पक्ष बनाए रखना है।

मतदान केंद्रों के आसपास भी प्रतिबंध

मतदान केंद्र और उसके आसपास किसी भी व्यक्ति द्वारा पोस्टर, झंडे, चुनाव चिन्ह या अन्य प्रचार सामग्री का प्रदर्शन नहीं किया जा सकेगा। मतदान केंद्र के आसपास पहचान स्थल के रूप में चुनावी प्रचार सामग्री लगाने पर भी रोक रहेगी।

प्रशासन ने चुनाव प्रचार में वाहनों के इस्तेमाल और ध्वनि प्रसारण यंत्रों के उपयोग को लेकर भी प्रतिबंधात्मक निर्देश जारी किए हैं। चुनाव प्रचार के दौरान नियमों का उल्लंघन करने पर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।

सार्वजनिक स्थान पर शराब पीने पर भी रोक

निषेधाज्ञा के तहत सार्वजनिक स्थानों पर शराब का सेवन प्रतिबंधित रहेगा। कोई व्यक्ति सार्वजनिक स्थल पर मदिरा का सेवन नहीं कर सकेगा और न ही किसी अन्य व्यक्ति को इसके लिए प्रेरित कर सकेगा।

मदिरा की दुकानों के अलावा सार्वजनिक स्थानों पर निजी उपयोग के लिए शराब लेकर आने-जाने को लेकर भी आदेश में प्रतिबंध निर्धारित किए गए हैं। ड्राई डे के दौरान शराब की बिक्री पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी।

आगामी आदेश तक प्रभावी रहेगा आदेश

जिला प्रशासन ने बताया कि मौजूदा परिस्थितियों में प्रत्येक व्यक्ति को व्यक्तिगत रूप से आदेश की जानकारी देना संभव नहीं है। इसलिए आदेश को जिले के प्रमुख स्थानों, उपखंड कार्यालयों, तहसील कार्यालयों, पंचायत समिति कार्यालयों और ग्राम पंचायत मुख्यालयों पर चस्पा कर आम लोगों को जानकारी दी जाएगी।

इसके अलावा प्रसार माध्यमों और समाचार पत्रों के जरिए भी नागरिकों को निषेधाज्ञा की जानकारी दी जाएगी।

प्रशासन ने नागरिकों और चुनाव से जुड़े सभी पक्षों से आदेशों का पालन करने की अपील की है। निषेधाज्ञा का उल्लंघन करने पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 223 के तहत दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

  • 3 अक्टूबर की मध्यरात्रि से निषेधाज्ञा लागू।

  • आगामी आदेश तक प्रभावी रहेगा आदेश।

  • जयपुर ग्रामीण और कोटपूतली-बहरोड़ क्षेत्रों में लागू।

  • बिना अनुमति राजनीतिक जुलूस और सभा पर रोक।

  • हथियार लेकर चलने और सार्वजनिक प्रदर्शन पर प्रतिबंध।

  • भड़काऊ भाषण और नारे लगाने पर कार्रवाई।

  • सोशल मीडिया पर धार्मिक और जातिगत दुष्प्रचार प्रतिबंधित।

  • सार्वजनिक संपत्ति पर पोस्टर-बैनर लगाने पर रोक।

  • धार्मिक स्थलों और चिकित्सा संस्थानों का चुनाव प्रचार में उपयोग नहीं।

  • मतदान केंद्रों के आसपास चुनावी प्रचार सामग्री पर रोक।

  • सार्वजनिक स्थानों पर शराब सेवन प्रतिबंधित।

  • उल्लंघन पर BNS की धारा 223 के तहत कार्रवाई।

GOLDEN HIND DESK