जिस जेल की थीं प्रभारी, अब उसी में कैदी बनकर लौटीं जेलर दिव्या चौधरी! अजमेर में गिरफ्तारी के बाद उठे कई सवाल
राजस्थान के अजमेर से जेल प्रशासन से जुड़ा एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने पूरे घटनाक्रम को चर्चा में ला दिया है। अजमेर महिला जेल की तत्कालीन प्रभारी जेलर दिव्या चौधरी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोप है कि उन्होंने दो महिला बंदियों को निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना जेल से बाहर निकालकर अपने निजी आवास पर ले जाकर साफ-सफाई और घरेलू काम कराया।
सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की है कि जिस महिला जेल की कभी दिव्या चौधरी प्रभारी थीं, गिरफ्तारी के बाद अदालत के आदेश पर उन्हें उसी जेल में न्यायिक हिरासत में भेजा गया है। पुलिस ने दिव्या चौधरी को 6 अक्टूबर 2026 कोटा के कुनाड़ी इलाके स्थित एक आवासीय फ्लैट से गिरफ्तार किया था। अगले दिन उन्हें अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया।
क्या है पूरा मामला?
पुलिस के अनुसार यह मामला 12 जुलाई 2026 का है। आरोप है कि उस समय अजमेर महिला जेल की प्रभारी रहीं दिव्या चौधरी ने महिला प्रहरी सोनिया चौधरी के साथ मिलकर जेल में निरुद्ध दो महिला बंदियों को नियमों के विपरीत जेल से बाहर निकाला।
जांच के मुताबिक दोनों महिला बंदियों को जेल से बाहर ले जाने के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। पुलिस का कहना है कि जेल कर्मचारियों ने इस पर आपत्ति भी जताई थी, लेकिन इसके बावजूद दोनों बंदियों को बाहर ले जाया गया।
आरोप है कि दोनों महिलाओं को दिव्या चौधरी के अजमेर स्थित निजी आवास पर ले जाया गया, जहां उनसे साफ-सफाई का काम कराया गया। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि दोनों बंदियों को जेल से बाहर ले जाने में और कौन-कौन लोग शामिल थे और इस पूरी कार्रवाई के पीछे वास्तविक उद्देश्य क्या था।
जेल कर्मचारियों ने किया था विरोध
पुलिस की जांच में सामने आए तथ्यों के अनुसार, जब दोनों महिला बंदियों को जेल से बाहर ले जाने की कोशिश की गई तो वहां मौजूद कर्मचारियों ने इसका विरोध किया था।
पुलिस का आरोप है कि आवश्यक अनुमति और निर्धारित रिकॉर्ड प्रक्रिया के बिना बंदियों को जेल से बाहर ले जाया गया। इसी घटनाक्रम के बाद मामला जेल प्रशासन के संज्ञान में आया और आगे जांच शुरू हुई।
मामले में केंद्रीय कारागृह अजमेर के अधीक्षक की ओर से शिकायत दर्ज कराई गई थी। इसके बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की।
दिव्या चौधरी और महिला प्रहरी सोनिया निलंबित
घटना सामने आने के बाद जेल प्रशासन ने तत्कालीन जेलर दिव्या चौधरी और महिला प्रहरी सोनिया चौधरी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की। दोनों को निलंबित किया गया और उनके मुख्यालय भी बदले गए थे।
रिपोर्ट्स के अनुसार, दिव्या चौधरी को बीकानेर सेंट्रल जेल तथा सोनिया चौधरी को जोधपुर सेंट्रल जेल से संबंधित मुख्यालय में रिपोर्ट करने के निर्देश दिए गए थे। हालांकि, दोनों के खिलाफ बाद में पुलिस कार्रवाई की स्थिति बनी।
5 अगस्त को दर्ज हुआ था मामला
पुलिस के अनुसार इस मामले में 5 अगस्त 2026 को अजमेर के सिविल लाइंस थाने में मामला दर्ज किया गया था। इसके बाद पुलिस ने दिव्या चौधरी की तलाश शुरू की।
कई दिनों तक तलाश के बावजूद उनका पता नहीं चल सका। पुलिस ने उनकी तलाश के लिए तकनीकी साक्ष्यों, CCTV फुटेज और अन्य जानकारी का इस्तेमाल किया। जांच के दौरान पुलिस को उनके कोटा में होने की जानकारी मिली।
कोटा के फ्लैट से हुई गिरफ्तारी
पुलिस के मुताबिक, करीब दो महीने की तलाश के बाद दिव्या चौधरी को 6 अक्टूबर को कोटा के कुनाड़ी क्षेत्र स्थित एक आवासीय फ्लैट से गिरफ्तार किया गया।
अजमेर पुलिस की साइबर सेल और जांच टीम को उनकी लोकेशन के बारे में जानकारी मिली थी। इसके बाद पुलिस टीम ने संबंधित स्थान पर कार्रवाई करते हुए उन्हें हिरासत में लिया।
गिरफ्तारी के बाद उन्हें अजमेर लाया गया और अदालत में पेश किया गया। अदालत के आदेश के बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
जिस जेल की थीं प्रभारी, वहीं पहुंचीं
इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा चर्चा इसी बात को लेकर है कि दिव्या चौधरी पहले जिस महिला जेल की प्रभारी थीं, गिरफ्तारी के बाद उन्हें उसी जेल में बंदी के तौर पर भेजा गया।
यानी कुछ समय पहले तक जिस जेल में वह प्रशासनिक जिम्मेदारी संभाल रही थीं, अब उसी परिसर में वह न्यायिक हिरासत में हैं। इस घटनाक्रम ने जेल प्रशासन और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े कई सवाल भी खड़े किए हैं।
सह-आरोपी महिला प्रहरी सोनिया चौधरी की तलाश जारी
मामले में दिव्या चौधरी के साथ नाम सामने आई महिला प्रहरी सोनिया चौधरी अभी पुलिस की पकड़ से बाहर बताई जा रही हैं। पुलिस उनकी तलाश कर रही है।
जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि दोनों महिला बंदियों को जेल से बाहर ले जाने की प्रक्रिया में और कौन-कौन लोग शामिल थे। साथ ही पुलिस यह भी जांच रही है कि बंदियों को निजी आवास पर ले जाने की पूरी योजना कैसे बनी और क्या इसमें किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका थी।
पुलिस किन धाराओं में कर रही है जांच?
पुलिस के अनुसार इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के साथ केंद्रीय कारागार अधिनियम की धारा 42 समेत अन्य धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।
रिपोर्ट्स में पुलिस अधिकारी के हवाले से बताया गया है कि जांच अभी जारी है और मामले से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी खंगाली जा रही है।
बंदियों को निजी काम के लिए बाहर ले जाने पर सवाल
इस मामले ने जेल में बंद कैदियों को निजी काम के लिए बाहर ले जाने और जेल प्रशासन की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं। जेल में निरुद्ध बंदियों को बाहर ले जाने के लिए निर्धारित नियम और प्रक्रिया होती है। ऐसे में बिना निर्धारित अनुमति या रिकॉर्ड प्रक्रिया के बंदियों को बाहर ले जाने का आरोप जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
हालांकि, मामले में लगे आरोपों पर अंतिम स्थिति अदालत की प्रक्रिया और पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी। अभी पुलिस की जांच जारी है और आरोपों को अदालत में साबित होना बाकी है।
जांच के बाद सामने आएगी पूरी तस्वीर
दिव्या चौधरी की गिरफ्तारी के बाद अब पुलिस मामले की आगे की जांच कर रही है। जांच में CCTV फुटेज, तकनीकी साक्ष्य, जेल रिकॉर्ड और संबंधित लोगों के बयान महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि दोनों महिला बंदियों को निजी आवास तक ले जाने के पीछे केवल साफ-सफाई का काम था या इसके पीछे कोई अन्य उद्देश्य भी था। सह-आरोपी महिला प्रहरी सोनिया चौधरी की गिरफ्तारी के बाद जांच में और तथ्य सामने आने की संभावना है।
अजमेर महिला जेल से जुड़ा यह मामला जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली और बंदियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। जिस अधिकारी के पास कभी उसी जेल की जिम्मेदारी थी, अब उसी जेल में न्यायिक हिरासत में पहुंचना इस मामले का सबसे अहम और चर्चित पहलू बन गया है।
GOLDEN HIND DESK