नरेश मीणा बोले- BJP में नहीं जाऊंगा, रविंद्र भाटी साथी; थप्पड़ कांड जैसी स्थिति पर कहा- ‘मैं गांधीवादी हूं, फिर देखते हैं क्या होता है’
राजस्थान की राजनीति में एक बार फिर नरेश मीणा चर्चा में हैं। किसानों को डीएपी और यूरिया खाद की उपलब्धता सहित अन्य मांगों को लेकर नरेश मीणा ने नंगे पैर पदयात्रा की। बारां से जयपुर की ओर निकली इस पदयात्रा के दौरान बड़ी संख्या में समर्थक भी उनके साथ नजर आए। जयपुर पहुंचने से पहले शिवदासपुरा टोल प्लाजा पर पुलिस ने बैरिकेडिंग कर उन्हें रोक दिया। इसके बाद पुलिस और आंदोलनकारियों के बीच काफी देर तक गतिरोध बना रहा।
नरेश मीणा का यह आंदोलन ऐसे समय में सामने आया है, जब राजस्थान में रबी सीजन की तैयारियों के बीच किसान खाद की उपलब्धता को लेकर परेशान होने की शिकायत कर रहे हैं। नरेश मीणा ने सरकार से किसानों को पर्याप्त मात्रा में डीएपी और यूरिया उपलब्ध कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि किसानों को खाद के लिए परेशान नहीं होना चाहिए और सरकार को इस समस्या का स्थायी समाधान करना चाहिए।
इस बीच नरेश मीणा के राजनीतिक भविष्य को लेकर भी सवाल उठे। भाजपा में शामिल होने की अटकलों पर उन्होंने साफ कहा कि वह भाजपा में नहीं जाएंगे। वहीं, जब उनसे राजस्थान के युवा नेता रविंद्र सिंह भाटी के साथ संबंधों को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने भाटी को अपना साथी बताया।
नंगे पैर जयपुर के लिए निकले नरेश मीणा
किसानों की खाद संबंधी समस्या को लेकर नरेश मीणा ने बारां से जयपुर तक पदयात्रा शुरू की थी। उन्होंने यह यात्रा नंगे पैर शुरू की। यात्रा के दौरान बड़ी संख्या में किसान और उनके समर्थक उनके साथ जुड़े।
लगातार पैदल चलने के कारण नरेश मीणा के पैरों में छाले पड़ने की बात सामने आई। इसके बावजूद उन्होंने यात्रा जारी रखी। कई जगह समर्थकों ने उनका स्वागत किया और किसानों की मांगों के समर्थन में नारे लगाए।
नरेश मीणा का कहना था कि किसानों को खेती के महत्वपूर्ण सीजन में खाद के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा है। डीएपी और यूरिया की उपलब्धता को लेकर किसानों में चिंता है। ऐसे में सरकार को किसानों की परेशानी को गंभीरता से लेना चाहिए।
शिवदासपुरा टोल पर पुलिस ने रोका
नरेश मीणा की पदयात्रा जब जयपुर की ओर बढ़ी तो पुलिस प्रशासन ने उन्हें शिवदासपुरा टोल प्लाजा के पास रोक दिया। पुलिस ने मौके पर बैरिकेडिंग कर रखी थी। बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी।
नरेश मीणा और उनके समर्थक जयपुर की ओर आगे बढ़ना चाहते थे, जबकि पुलिस उन्हें आगे जाने की अनुमति नहीं दे रही थी। इसके चलते मौके पर काफी देर तक स्थिति तनावपूर्ण बनी रही।
आंदोलनकारियों की संख्या बढ़ने के कारण टोंक रोड और जयपुर-कोटा मार्ग पर यातायात भी प्रभावित हुआ। कई वाहन जाम में फंस गए। पुलिस प्रशासन की ओर से स्थिति को नियंत्रित करने और यातायात व्यवस्था बनाए रखने का प्रयास किया गया।
थप्पड़ कांड को लेकर पूछा गया सवाल
नरेश मीणा से जब करीब दो साल पहले हुए थप्पड़ कांड को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने अपने मौजूदा आंदोलन को गांधीवादी तरीके से चलाने की बात कही।
दरअसल, देवली-उनियारा विधानसभा उपचुनाव के दौरान एसडीएम को थप्पड़ मारने की घटना के बाद नरेश मीणा काफी चर्चा में आए थे। इस घटना के बाद उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई हुई थी और मामला लंबे समय तक राजस्थान की राजनीति में चर्चा का विषय बना रहा।
अब मौजूदा आंदोलन के दौरान जब उनसे पूछा गया कि क्या दोबारा ऐसी स्थिति पैदा होने की आशंका है, तो उन्होंने कहा कि ‘मैं गांधीवादी हूं, फिर देखते हैं क्या होता है।’
नरेश मीणा ने अपने आंदोलन को किसानों के मुद्दे से जोड़ते हुए कहा कि उनका उद्देश्य किसानों की समस्याओं को सरकार तक पहुंचाना है। हालांकि, शिवदासपुरा में पुलिस की बैरिकेडिंग के बाद दोनों पक्षों के बीच गतिरोध जरूर देखने को मिला।
BJP में जाने की अटकलों पर नरेश मीणा का जवाब
पदयात्रा के दौरान नरेश मीणा से उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर भी सवाल किया गया। खास तौर पर भाजपा में शामिल होने की चर्चाओं पर उन्होंने स्पष्ट किया कि वह भाजपा में नहीं जाएंगे।
उनके इस बयान के बाद उनके राजनीतिक रुख को लेकर स्थिति काफी हद तक स्पष्ट हुई है। हालांकि, नरेश मीणा पहले भी किसानों और स्थानीय मुद्दों को लेकर सरकार के खिलाफ आवाज उठाते रहे हैं।
भाजपा में जाने की अटकलों के बीच उनका यह बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि राजस्थान की राजनीति में उनका प्रभाव खास तौर पर किसान और युवा वर्ग के बीच आंदोलनात्मक राजनीति से जुड़ा रहा है।
रविंद्र भाटी को बताया साथी
नरेश मीणा से जब रविंद्र सिंह भाटी को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने उन्हें अपना साथी बताया। रविंद्र भाटी राजस्थान की राजनीति में युवा चेहरा हैं और बाड़मेर के शिव क्षेत्र से विधायक हैं।
नरेश मीणा और रविंद्र भाटी दोनों ही अलग-अलग मुद्दों पर युवाओं और आम लोगों के बीच सक्रिय रहे हैं। ऐसे में नरेश मीणा द्वारा भाटी को साथी बताए जाने के बाद दोनों नेताओं के बीच भविष्य में किसी तरह के राजनीतिक या सामाजिक समन्वय को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।
हालांकि, नरेश मीणा के बयान के आधार पर ही इसे किसी नए राजनीतिक गठजोड़ के रूप में देखना जल्दबाजी होगी। दोनों नेताओं की ओर से किसी औपचारिक राजनीतिक संगठन या गठबंधन की घोषणा नहीं की गई है।
खाद की समस्या को लेकर सरकार पर दबाव
नरेश मीणा के आंदोलन का मुख्य मुद्दा किसानों को खाद उपलब्ध कराना है। उनका आरोप है कि किसानों को डीएपी और यूरिया के लिए परेशानी उठानी पड़ रही है। किसान अपनी फसल की बुवाई के लिए खाद की व्यवस्था में लगे हैं, ऐसे समय में खाद की कमी की शिकायतें किसानों की चिंता बढ़ा रही हैं।
नरेश मीणा ने मांग की कि सरकार किसानों को पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध करवाए और कालाबाजारी या अनियमितता की शिकायतों पर कार्रवाई करे।
उन्होंने कहा कि किसान पहले से ही खेती की लागत, मौसम और फसल के दाम जैसी कई चुनौतियों का सामना कर रहा है। ऐसे में खाद की समस्या उसकी परेशानी को और बढ़ा देती है।
मुख्यमंत्री स्तर पर बातचीत की मांग
नरेश मीणा ने किसानों की मांगों को लेकर सरकार के साथ बातचीत की भी मांग की। उनका कहना था कि वह किसानों की समस्याओं पर उच्च स्तर पर बातचीत चाहते हैं।
शिवदासपुरा टोल पर पुलिस प्रशासन के अधिकारियों ने उनसे बातचीत की कोशिश की। प्रशासन की ओर से आंदोलन को शांतिपूर्ण तरीके से समाप्त करने की अपील की गई।
बाद में सरकार की ओर से मिले आश्वासन के बाद जयपुर कूच को फिलहाल स्थगित करने की जानकारी सामने आई। हालांकि, नरेश मीणा ने किसानों की मांगों को लेकर अपना आंदोलन जारी रखने की बात कही।
गांधी की तस्वीर के साथ पदयात्रा
नरेश मीणा की पदयात्रा के दौरान महात्मा गांधी की तस्वीर भी नजर आई। उन्होंने अपने आंदोलन को गांधीवादी तरीके से चलाने की बात कही।
उनका कहना है कि किसानों के मुद्दे को लेकर वह शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात सरकार तक पहुंचाना चाहते हैं। इसी वजह से उन्होंने नंगे पैर पदयात्रा का रास्ता चुना।
पदयात्रा के दौरान उनके साथ चल रहे समर्थकों ने भी किसानों की मांगों को लेकर नारे लगाए। सोशल मीडिया पर भी उनकी पदयात्रा की तस्वीरें और वीडियो सामने आए।
आंदोलन से राजस्थान की राजनीति में फिर चर्चा
नरेश मीणा का नाम राजस्थान में आंदोलनों और किसान मुद्दों को लेकर पहले भी चर्चा में रहा है। देवली-उनियारा उपचुनाव के दौरान हुए विवाद के बाद वह लंबे समय तक राजनीतिक सुर्खियों में रहे थे।
अब खाद के मुद्दे को लेकर शुरू की गई पदयात्रा ने उन्हें फिर चर्चा में ला दिया है। इस बार उनके आंदोलन का केंद्र किसान और खाद की समस्या है, लेकिन भाजपा में शामिल होने से इनकार और रविंद्र भाटी को साथी बताने वाले बयान ने राजनीतिक चर्चा को भी हवा दी है।
फिलहाल नरेश मीणा का कहना है कि उनका मुख्य फोकस किसानों की समस्याओं पर है। जयपुर कूच को लेकर प्रशासन से बातचीत के बाद आगे की रणनीति क्या होगी, इस पर सभी की नजर बनी हुई है।
आगे की रणनीति पर नजर
शिवदासपुरा टोल पर हुए घटनाक्रम के बाद प्रशासन और नरेश मीणा के बीच बातचीत का रास्ता खुला है। सरकार की ओर से किसानों की खाद संबंधी समस्या के समाधान को लेकर क्या कदम उठाए जाते हैं, यह आने वाले दिनों में महत्वपूर्ण रहेगा।
वहीं, नरेश मीणा के भाजपा में शामिल नहीं होने के बयान के बाद उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर चल रही चर्चाओं पर फिलहाल विराम लगा है। रविंद्र भाटी को साथी बताए जाने के बाद दोनों नेताओं की आगामी गतिविधियों पर भी राजनीतिक नजरें रहेंगी।
नरेश मीणा के आंदोलन का केंद्र डीएपी-यूरिया खाद की उपलब्धता और किसानों की समस्याएं हैं। उन्होंने गांधीवादी तरीके से आंदोलन जारी रखने की बात कही है। अब देखना होगा कि सरकार किसानों की मांगों पर किस तरह आगे बढ़ती है और नरेश मीणा की अगली रणनीति क्या रहती है।
GOLDEN HIND DESK