अंबेडकर जयंती पर राज्यपाल का संदेश: बाबा साहेब ने दी सामाजिक समरसता और राष्ट्र सर्वोच्च की दृष्टि
हरिभाऊ बागडे ने डॉ. भीमराव अंबेडकर की 135वीं जयंती के अवसर पर आयोजित समारोह में उन्हें एक महान विचारक और राष्ट्रनिर्माता के रूप में याद किया। उन्होंने कहा कि बाबा साहेब केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि अपने आप में एक संस्था थे, जिन्होंने देश को सामाजिक समरसता का मंत्र दिया और ‘राष्ट्र सर्वोच्च’ की दृष्टि प्रदान की।
राज्यपाल ने अपने संबोधन में कहा कि डॉ. अंबेडकर भारतीय संस्कृति के मूल्यों में रचे-बसे महामना थे। उन्होंने बताया कि सच्चा महामना वही होता है, जो अपने विचारों और कर्मों से समाज को दिशा देता है और अपने जीवनकाल में ही महान आदर्श स्थापित करता है।
संविधान निर्माण में अद्वितीय योगदान
राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने कहा कि बाबा साहेब ने अपने जीवन का बड़ा हिस्सा अध्ययन और शोध में बिताया। उन्होंने देश-दुनिया के कानूनों का गहन अध्ययन किया, जिसके परिणामस्वरूप भारत को विश्व का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक संविधान मिला।
उन्होंने कहा कि डॉ. अंबेडकर का यह योगदान केवल भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए प्रेरणास्रोत है। उनका संविधान आज भी देश की एकता, अखंडता और लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत बनाए हुए है।
वंचित वर्ग के उत्थान के लिए समर्पित जीवन
राज्यपाल ने कहा कि बाबा साहेब ने अपना पूरा जीवन समाज के वंचित और कमजोर वर्गों के उत्थान के लिए समर्पित कर दिया। उन्होंने समानता, न्याय और अधिकारों के लिए निरंतर संघर्ष किया।
उन्होंने 1938 में बॉम्बे विधानसभा में डॉ. अंबेडकर के उस प्रसिद्ध कथन को याद किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि सभी लोग पहले और अंततः भारतीय हों—यह विचार आज भी राष्ट्रीय एकता की आधारशिला है।
‘शिक्षित बनो, संगठित रहो, संघर्ष करो’ का संदेश
डॉ. भीमराव अंबेडकर का प्रसिद्ध नारा—‘शिक्षित बनो, संगठित रहो, संघर्ष करो’—आज भी समाज के लिए प्रेरणास्रोत है। राज्यपाल ने कहा कि यह केवल एक नारा नहीं, बल्कि जीवन जीने का मार्ग है, जो व्यक्ति को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाता है।
उन्होंने कहा कि शिक्षा और जागरूकता के माध्यम से ही समाज में वास्तविक परिवर्तन संभव है, और बाबा साहेब ने इसी दिशा में लगातार कार्य किया।
राष्ट्र प्रथम की भावना पर जोर
राज्यपाल ने कहा कि डॉ. अंबेडकर ने ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना को हमेशा सर्वोपरि रखा। उनके विचारों में ऐसा राष्ट्रवाद था, जिसमें किसी भी प्रकार का भेदभाव—चाहे वह जाति, वर्ग, धर्म या वर्ण के आधार पर हो—स्थान नहीं रखता।
उन्होंने कहा कि बाबा साहेब का यह दृष्टिकोण आज के समय में भी उतना ही प्रासंगिक है, जब समाज को एकजुट रखने की आवश्यकता पहले से अधिक है।
विकास परियोजनाओं में महत्वपूर्ण भूमिका
राज्यपाल ने डॉ. अंबेडकर के विकासात्मक दृष्टिकोण को याद करते हुए कहा कि उन्होंने देश में कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं की स्थापना में अहम भूमिका निभाई।
इनमें प्रमुख रूप से:
- दामोदर घाटी परियोजना
- हीराकुंड परियोजना
- सोन नदी परियोजना
जैसी योजनाएं शामिल हैं, जिन्होंने देश के औद्योगिक और कृषि विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
युवाओं के लिए प्रेरणा
राज्यपाल ने युवाओं से आह्वान किया कि वे बाबा साहेब के विचारों को अपने जीवन में अपनाएं और समाज के विकास में सक्रिय भूमिका निभाएं। उन्होंने कहा कि यदि युवा उनके आदर्शों पर चलें, तो देश को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जा सकता है।
निष्कर्ष
अंबेडकर जयंती के अवसर पर दिया गया यह संदेश न केवल बाबा साहेब के योगदान को याद करता है, बल्कि समाज को उनके आदर्शों पर चलने के लिए प्रेरित भी करता है।
हरिभाऊ बागडे के शब्दों में, डॉ. भीमराव अंबेडकर एक ऐसे युगपुरुष थे, जिनके विचार और कार्य आज भी देश को दिशा दे रहे हैं।
उनका जीवन और दर्शन आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव मार्गदर्शक रहेगा।
Golden Hind Desk