निकाय चुनाव पर गहलोत-डोटासरा का BJP पर हमला
निकाय चुनाव पर गहलोत का BJP पर हमला, बोले- बेईमानी-बेशर्मी की हदें पार; डोटासरा ने बताया ‘काला अध्याय’
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राजस्थान निकाय चुनाव: दिग्गजों के गढ़ में मिला-जुला परिणाम, BJP-कांग्रेस दोनों को मिली जीत
राजस्थान निकाय चुनाव: दिग्गज नेताओं के गढ़ में मिला-जुला प्रदर्शन, कई जगह BJP-कांग्रेस आमने-सामने
राजस्थान के नगर निकाय चुनावों के बाद अब अलग-अलग राजनीतिक नेताओं के प्रभाव वाले क्षेत्रों के परिणाम भी चर्चा में हैं। शहरी निकायों में अध्यक्ष पद के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने कई जगह बोर्ड बनाने में सफलता हासिल की है, जबकि कांग्रेस ने भी अपने प्रभाव वाले कुछ क्षेत्रों में जीत दर्ज कराई। उपलब्ध परिणामों के मुताबिक 301 शहरी स्थानीय निकायों के परिणाम घोषित होने तक भाजपा ने 197 निकायों में बोर्ड बनाया, जबकि कांग्रेस के 94 निकायों में बोर्ड बने। निर्दलीयों ने भी सात निकायों में अध्यक्ष पद हासिल किया।
इन चुनावों में प्रदेश के बड़े नेताओं के प्रभाव वाले इलाकों की तस्वीर पूरी तरह एकतरफा नहीं रही। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और भाजपा के वरिष्ठ नेता राजेंद्र राठौड़ से जुड़े क्षेत्रों में भाजपा को सफलता मिली, वहीं कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली के प्रभाव वाले इलाकों में कांग्रेस ने भी अपनी स्थिति मजबूत दिखाई। इस वजह से निकाय चुनाव के परिणामों को स्थानीय राजनीतिक समीकरणों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अध्यक्ष चुनाव में भाजपा का प्रदर्शन मजबूतनगर निकायों के अध्यक्ष पद के चुनाव में भाजपा ने बड़ी संख्या में बोर्ड अपने पक्ष में किए। 301 घोषित निकायों में भाजपा के 197 और कांग्रेस के 94 बोर्ड बनने की जानकारी आकाशवाणी ने दी है। इसके अलावा सात निकायों में निर्दलीय अध्यक्ष चुने गए, जबकि राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी, आम आदमी पार्टी और CPI(M) के उम्मीदवारों ने भी एक-एक निकाय में अध्यक्ष पद हासिल किया।
इससे साफ है कि अध्यक्ष पद के चुनाव में केवल भाजपा और कांग्रेस के बीच ही मुकाबला नहीं रहा। कई जगह निर्दलीय पार्षदों की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही। कुछ निकायों में बहुमत का आंकड़ा किसी एक दल के पास नहीं होने के कारण अध्यक्ष पद के चुनाव में स्थानीय समीकरण और पार्षदों का समर्थन निर्णायक बना।
बड़े नेताओं के क्षेत्रों में अलग-अलग परिणामनिकाय चुनाव में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और भाजपा के अन्य वरिष्ठ नेताओं के प्रभाव वाले क्षेत्रों में पार्टी को कई जगह सफलता मिली। वहीं कांग्रेस के प्रमुख नेताओं के क्षेत्रों में भी पार्टी ने कुछ निकायों में अपना आधार बनाए रखा।
इस चुनाव में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली से जुड़े क्षेत्रों के परिणामों पर भी राजनीतिक नजर रही। कांग्रेस ने इन क्षेत्रों में कुछ महत्वपूर्ण निकायों में जीत हासिल की। इससे यह तस्वीर सामने आती है कि स्थानीय निकाय चुनावों में राज्य स्तरीय राजनीतिक प्रभाव के साथ-साथ स्थानीय संगठन, प्रत्याशी और क्षेत्रीय समीकरण भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
सचिन पायलट के टोंक क्षेत्र में चर्चासचिन पायलट के प्रभाव वाले टोंक क्षेत्र का परिणाम भी चुनाव के बाद चर्चा में रहा। टोंक नगर परिषद के सभापति पद के चुनाव में मयंक गोयल के जीतने की रिपोर्ट सामने आई है। इसके अलावा जिले की विभिन्न नगर पालिकाओं में भी अध्यक्ष पद के परिणाम घोषित हुए।
टोंक को लंबे समय से सचिन पायलट की राजनीति से जोड़कर देखा जाता है। ऐसे में यहां के निकाय परिणामों को लेकर राजनीतिक चर्चाएं होना स्वाभाविक है। हालांकि स्थानीय निकाय चुनाव के परिणामों को किसी एक नेता के व्यक्तिगत प्रभाव का सीधा पैमाना मानने के बजाय स्थानीय उम्मीदवारों और वार्ड स्तर के समीकरणों को भी ध्यान में रखना जरूरी है।
भाजपा के लिए कई बड़े निकायों में सफलताराज्य के बड़े शहरी निकायों में भी भाजपा ने कई जगह सफलता हासिल की। पांच नगर निगमों के परिणाम घोषित होने पर भाजपा ने चार में बोर्ड बनाया, जबकि बीकानेर में कांग्रेस को सफलता मिली। अलवर, उदयपुर, अजमेर और पाली में भाजपा के महापौर चुने गए, जबकि भरतपुर और भीलवाड़ा में भाजपा उम्मीदवार पहले ही निर्विरोध महापौर चुने जा चुके थे। जयपुर, जोधपुर और कोटा नगर निगम के महापौर पद के चुनाव 25 सितंबर को होने हैं।
इस तरह नगर निगम स्तर पर भी भाजपा को कई महत्वपूर्ण शहरों में बढ़त मिली है। हालांकि जयपुर, जोधपुर और कोटा के महापौर चुनाव अभी बाकी होने के कारण इन तीन बड़े शहरों की तस्वीर 25 सितंबर के बाद पूरी तरह स्पष्ट होगी।
कांग्रेस ने भी कई क्षेत्रों में बनाए बोर्डनिकाय चुनाव में कांग्रेस का प्रदर्शन भी पूरी तरह कमजोर नहीं रहा। 94 शहरी स्थानीय निकायों में कांग्रेस के बोर्ड बनने की जानकारी सामने आई है। कई स्थानों पर पार्टी ने अपने पार्षदों के समर्थन से अध्यक्ष पद हासिल किया।
जैसलमेर जिले के परिणाम भी मिश्रित रहे। जैसलमेर नगर परिषद में भाजपा के विजय डांगरा सभापति चुने गए, जबकि पोकरण नगरपालिका में कांग्रेस की कल्पना रंगा अध्यक्ष बनीं। पोकरण में निर्दलीय पार्षदों की भूमिका भी महत्वपूर्ण बताई गई।
भीलवाड़ा में भी भाजपा ने जिले की 10 नगर पालिकाओं में से सात में अध्यक्ष पद हासिल किया, जबकि कांग्रेस को तीन नगर पालिकाओं में सफलता मिली।
निर्दलीयों ने बदले कई समीकरणनिकाय चुनाव का एक महत्वपूर्ण पहलू निर्दलीय उम्मीदवारों का प्रदर्शन भी रहा। वार्ड चुनावों के अंतिम आंकड़ों में भाजपा ने 4,179 वार्ड, कांग्रेस ने 3,613 और निर्दलीयों ने 2,273 वार्ड जीते थे। कई निकायों में किसी एक पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलने के कारण निर्दलीय पार्षदों की भूमिका बढ़ गई।
यही कारण है कि कुछ जगह वार्ड चुनाव में अधिक पार्षद जीतने वाली पार्टी भी अध्यक्ष पद का चुनाव नहीं जीत सकी। धौलपुर नगर परिषद में कांग्रेस के पास 27 पार्षद होने के बावजूद निर्दलीय उम्मीदवार गिरीश कुमार गर्ग अध्यक्ष चुने गए। इस तरह के परिणाम बताते हैं कि अध्यक्ष पद का चुनाव और वार्ड स्तर के परिणाम अलग-अलग राजनीतिक समीकरण पैदा कर सकते हैं।
भाजपा-कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप भी जारीनिकाय चुनाव के परिणामों के बाद भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हुई है। भाजपा ने परिणामों को जनता के समर्थन के रूप में पेश किया है। वहीं कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने चुनाव प्रक्रिया को लेकर भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। डोटासरा ने सरकारी मशीनरी और पुलिस प्रशासन के दुरुपयोग का आरोप लगाया है। ये कांग्रेस के आरोप हैं, जिन पर भाजपा की ओर से अलग राजनीतिक प्रतिक्रिया सामने आई है।
ऐसे आरोपों को चुनाव परिणामों के तथ्य से अलग देखना जरूरी है। परिणामों के स्तर पर भाजपा ने बड़ी संख्या में बोर्ड बनाए हैं, जबकि कांग्रेस और निर्दलीयों ने भी कई निकायों में प्रभाव कायम रखा है।
स्थानीय मुद्दों की भी रही भूमिकानगर निकाय चुनाव विधानसभा या लोकसभा चुनावों से अलग होते हैं। यहां स्थानीय सड़क, सफाई, पानी, सीवरेज, स्ट्रीट लाइट, यातायात, अतिक्रमण और वार्ड स्तर की समस्याएं मतदाताओं के फैसले को प्रभावित कर सकती हैं। इसके अलावा उम्मीदवार की व्यक्तिगत छवि, स्थानीय संगठन और पार्षदों के बीच समीकरण भी अध्यक्ष पद के चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
इसी वजह से किसी नेता के क्षेत्र में पार्टी की जीत या हार को केवल राज्य स्तरीय राजनीति के आधार पर समझना पर्याप्त नहीं होगा। अलग-अलग निकायों में परिणामों के पीछे स्थानीय परिस्थितियां भी महत्वपूर्ण रही हैं।
आगे जयपुर, जोधपुर और कोटा पर नजरअब प्रदेश की नजर जयपुर, जोधपुर और कोटा नगर निगम के महापौर चुनाव पर है। इन तीनों नगर निगमों के महापौर पद के चुनाव 25 सितंबर को प्रस्तावित हैं और इसी दिन परिणाम भी घोषित किए जाएंगे।
कुल मिलाकर राजस्थान के निकाय चुनावों में भाजपा ने अध्यक्ष पद के चुनाव में बड़ी संख्या में बोर्ड बनाए हैं, लेकिन बड़े नेताओं के प्रभाव वाले सभी क्षेत्रों में परिणाम एक जैसे नहीं रहे। भाजपा और कांग्रेस दोनों को अलग-अलग क्षेत्रों में सफलता मिली है, जबकि निर्दलीयों ने कई जगह समीकरण प्रभावित किए हैं। इसलिए इन परिणामों की तस्वीर को स्थानीय स्तर के राजनीतिक समीकरणों, उम्मीदवारों और निकायवार नतीजों के साथ देखना अधिक उपयुक्त होगा।
निकाय चुनाव में जीत पर CM भजनलाल शर्मा का कांग्रेस पर निशाना, बोले- कांग्रेसियों को हमेशा कुर्सी का डर रहता था
सीएम भजनलाल शर्मा बोले- कांग्रेस को हमेशा कुर्सी का डर रहता था, जनता ने निकाय चुनाव में दिया जवाब
राजस्थान में नगर निकाय चुनाव के नतीजों के बाद मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने जनता का आभार जताते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा। मुख्यमंत्री ने कहा कि निकाय चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को मिले समर्थन के लिए वे प्रदेश की जनता का धन्यवाद करते हैं। उन्होंने कहा कि जनता ने अपने मत के जरिए सरकार की नीतियों और विकास कार्यों पर भरोसा जताया है।
मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि कांग्रेस नेताओं को हमेशा अपनी कुर्सी का डर रहता था। इसी वजह से पिछली सरकार के दौरान बार-बार चुनाव कराने की स्थिति बनती रही। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के नेता हर तीन-तीन महीने में चुनाव कराने की बात करते थे और सत्ता में बने रहने को लेकर चिंतित रहते थे।
सीएम ने कहा कि नगर निकाय चुनाव शुरू होने से पहले ही कांग्रेस की ओर से सत्ता के दुरुपयोग के आरोप लगाए जाने लगे थे। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि जब चुनाव प्रक्रिया शुरू ही नहीं हुई थी, तब सत्ता के दुरुपयोग की बात कैसे की जा सकती थी।
निकाय चुनाव में जनता का आभारमुख्यमंत्री ने निकाय चुनाव में मतदान करने वाले सभी मतदाताओं का आभार जताया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता का मत सबसे महत्वपूर्ण होता है। चुनाव के दौरान जनता ने जिस तरह से भागीदारी निभाई, वह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार राजस्थान के विकास के लिए लगातार काम कर रही है। सरकार का प्रयास है कि शहरों और कस्बों में आधारभूत सुविधाओं को मजबूत किया जाए और आम लोगों को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराई जाएं।
कांग्रेस के आरोपों पर सीएम का पलटवारमुख्यमंत्री ने कांग्रेस की ओर से लगाए गए आरोपों पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि चुनाव प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही कांग्रेस ने सत्ता के दुरुपयोग को लेकर सवाल उठाने शुरू कर दिए थे। सीएम के मुताबिक, चुनाव में जनता ने अपने मत के जरिए अपना फैसला सुनाया है।
उन्होंने कहा कि चुनाव लोकतंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और जनता को अपने प्रतिनिधि चुनने का पूरा अधिकार है। सरकार चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता के लिए प्रतिबद्ध है।
विकास के मुद्दे पर सरकार का फोकसमुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार का मुख्य फोकस राजस्थान के विकास और आमजन की समस्याओं के समाधान पर है। प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में सड़क, पानी, सफाई, बिजली, यातायात और अन्य नागरिक सुविधाओं को बेहतर बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि नगर निकायों के माध्यम से स्थानीय स्तर पर विकास कार्यों को गति देने का प्रयास किया जाएगा। शहरों में बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ-साथ नागरिकों की शिकायतों के त्वरित समाधान पर भी सरकार ध्यान दे रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि निकाय चुनाव में जनता ने जिस विश्वास के साथ मतदान किया है, उस विश्वास को कायम रखना सरकार और जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी है। उन्होंने भाजपा के कार्यकर्ताओं और प्रत्याशियों का भी आभार जताते हुए कहा कि चुनाव में पार्टी के कार्यकर्ताओं ने मेहनत और समर्पण के साथ काम किया।
जनता के फैसले को बताया महत्वपूर्णसीएम ने कहा कि लोकतंत्र में अंतिम फैसला जनता का होता है। निकाय चुनाव में जनता ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल करते हुए स्थानीय स्तर पर अपने प्रतिनिधियों का चुनाव किया है। उन्होंने कहा कि निर्वाचित प्रतिनिधियों को अब जनता की उम्मीदों पर खरा उतरने के लिए काम करना होगा।
मुख्यमंत्री ने प्रदेश की जनता को भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार विकास और जनकल्याण के एजेंडे पर आगे भी काम करती रहेगी। उन्होंने कहा कि राजस्थान को विकास के क्षेत्र में आगे ले जाने के लिए सरकार, स्थानीय निकाय और जनप्रतिनिधि मिलकर काम करेंगे।
मुख्यमंत्री के बयान के बाद निकाय चुनाव को लेकर प्रदेश की राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। भाजपा जहां चुनाव परिणामों को जनता के समर्थन के रूप में देख रही है, वहीं कांग्रेस की ओर से चुनाव प्रक्रिया और सरकार की भूमिका को लेकर उठाए गए सवाल राजनीतिक बहस का विषय बने हुए हैं।
राजस्थान से मानसून की विदाई शुरू, पारा 40 के पार; इस सीजन 21% कम बारिश
राजस्थान से मानसून की विदाई शुरू, पारा 40 के पार; आज बारिश का बड़ा अलर्ट नहीं, सीजन में 21% तक कम बारिश
राजस्थान में दक्षिण-पश्चिम मानसून अब विदाई की ओर बढ़ गया है। प्रदेश के पश्चिमी हिस्सों से मानसून की वापसी शुरू हो चुकी है और अगले कुछ दिनों में इसके राज्य के अन्य हिस्सों से भी पीछे हटने की संभावना है। मानसून की गतिविधियां कमजोर होने के साथ दिन के तापमान में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। पश्चिमी राजस्थान में गर्मी का असर फिर तेज हो गया है।
भारतीय मौसम विभाग के अनुसार मानसून की वापसी सामान्य समय के आसपास शुरू हुई है। 19 सितंबर तक पश्चिमी राजस्थान के कुछ हिस्सों से मानसून वापस हो चुका था। इसके बाद जैसलमेर, नागौर और सीकर की दिशा में भी मानसून की वापसी आगे बढ़ी। IMD के अनुसार मानसून की विदाई की प्रक्रिया में लगातार शुष्क मौसम, बारिश की गतिविधियों में कमी और निचले वायुमंडल में बदलाव जैसे संकेत देखे जाते हैं।
जैसलमेर में 40 डिग्री के पार पहुंचा तापमानमानसून की विदाई के साथ ही पश्चिमी राजस्थान में गर्मी ने फिर जोर पकड़ना शुरू कर दिया है। जैसलमेर में अधिकतम तापमान 40.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। यहां लगातार दूसरे दिन तापमान 40 डिग्री के पार रहा। वहीं बाड़मेर में अधिकतम तापमान करीब 39.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। पश्चिमी राजस्थान के कई जिलों में दिन का तापमान 36 से 40 डिग्री के बीच बना हुआ है।
आज अधिकांश हिस्सों में मौसम शुष्क22 सितंबर को राजस्थान के अधिकांश हिस्सों में मौसम मुख्य रूप से शुष्क रहने का अनुमान है। उपलब्ध मौसम अपडेट के अनुसार प्रदेश में व्यापक बारिश का कोई बड़ा अलर्ट नहीं है। हालांकि कोटा, उदयपुर और अजमेर संभाग के कुछ इलाकों में स्थानीय स्तर पर हल्की बारिश या बूंदाबांदी हो सकती है। जयपुर संभाग में धूप के साथ कुछ स्थानों पर आंशिक बादल रहने की संभावना है।
पश्चिमी राजस्थान में मौसम अपेक्षाकृत ज्यादा गर्म और शुष्क रहने की संभावना है। जैसलमेर, बाड़मेर, जोधपुर और बीकानेर क्षेत्र में मानसून की वापसी का असर साफ दिखाई देने लगा है। आने वाले दिनों में बारिश की गतिविधियों में और कमी आने तथा तापमान में धीरे-धीरे बढ़ोतरी की संभावना है।
राजस्थान में सामान्य से कम बारिशइस मानसून सीजन में राजस्थान में बारिश सामान्य से कम रही है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार प्रदेश में मौसमी बारिश की कमी करीब 21 से 40 प्रतिशत के बीच रहने की संभावना जताई गई है। यह कमी पूरे राज्य में एक जैसी नहीं है और अलग-अलग क्षेत्रों में बारिश का वितरण अलग रहा है।
देश के स्तर पर भी 19 सितंबर तक मौसमी बारिश सामान्य से करीब 15 प्रतिशत कम दर्ज की गई थी। IMD के आंकड़ों के मुताबिक 1 जून से 19 सितंबर तक देश में करीब 695.6 मिलीमीटर बारिश हुई, जबकि सामान्य बारिश करीब 817 मिलीमीटर के आसपास होती है।
किसानों के लिए मानसून की विदाई अहममानसून की वापसी का असर खेती पर भी पड़ सकता है। खरीफ फसलों के अंतिम चरण में मिट्टी में नमी महत्वपूर्ण होती है, जबकि रबी की बुवाई की तैयारी भी आने वाले समय में शुरू होगी। ऐसे में जिन इलाकों में बारिश की कमी रही है, वहां किसान मौसम और मिट्टी में उपलब्ध नमी के अनुसार आगे की कृषि गतिविधियों की योजना बनाएंगे।
राजस्थान में मानसून की विदाई का सिलसिला अभी जारी है। मौसम विभाग के मानकों के अनुसार मानसून की वापसी चरणबद्ध तरीके से होती है और इसके लिए लगातार कई दिनों तक बारिश की गतिविधियों में कमी तथा वातावरण में नमी घटने जैसे संकेतों का आकलन किया जाता है।
आगे कैसा रहेगा मौसम?आने वाले चार-पांच दिनों में राजस्थान के अधिकांश हिस्सों में मौसम मुख्य रूप से साफ और शुष्क रहने की संभावना है। कुछ दक्षिण-पूर्वी और पूर्वी हिस्सों में स्थानीय स्तर पर हल्की बारिश या बूंदाबांदी हो सकती है, लेकिन व्यापक बारिश की गतिविधियां कमजोर रहने के आसार हैं। वहीं पश्चिमी राजस्थान में तापमान बढ़ने के साथ गर्मी का असर और महसूस हो सकता है।
राजस्थान में मानसून अब अंतिम दौर में पहुंच चुका है। पश्चिमी जिलों से बारिश का दौर लगभग थम गया है, तापमान 40 डिग्री के पार पहुंचने लगा है और प्रदेश के बड़े हिस्से में मौसम शुष्क रहने की संभावना है। इस बार कम बारिश के कारण मानसून सीजन सामान्य से नीचे रहा है, जबकि अब मौसम धीरे-धीरे गर्म और शुष्क होने की दिशा में बढ़ रहा है।
बेहतर चिकित्सीय प्रबंधन से राजस्थान में मातृ मृत्युदर में कमी, विशेषज्ञ डॉक्टरों की भर्ती के निर्देश
बेहतर चिकित्सीय प्रबंधन से प्रदेश में मातृ मृत्युदर में कमी, विशेषज्ञ डॉक्टरों की भर्ती के निर्देश
राजस्थान में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को और बेहतर बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। मुख्य सचिव श्री वी. श्रीनिवास ने प्रदेश के सभी चिकित्सा संस्थानों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता और जरूरत का आकलन कर आवश्यकतानुसार भर्ती प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए हैं।
मुख्य सचिव सोमवार को स्वास्थ्य भवन में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित समीक्षा बैठक में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं, उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की पहचान एवं फॉलोअप, प्रसव सखी कार्यक्रम तथा नवजात शिशु देखभाल सेवाओं की समीक्षा कर रहे थे।
सितंबर में मातृ मृत्यु के मामलों में कमीबैठक में मुख्य सचिव ने 6 सितम्बर से 17 सितम्बर तक प्रदेश में हुई मातृ मृत्यु की अस्पतालवार समीक्षा की। उन्होंने संबंधित अस्पताल प्रभारियों और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों से प्रत्येक मामले की जानकारी लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
उन्होंने बताया कि उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की समय पर पहचान, नियमित फॉलोअप और प्रसव पूर्व जांच सेवाओं की निगरानी का सकारात्मक असर दिखाई दे रहा है। अगस्त में 73 मातृ मृत्यु के मामले सामने आए थे, जबकि सितंबर में यह संख्या घटकर 35 रही।
मुख्य सचिव ने उदयपुर जिले में हुई मातृ मृत्यु के मामलों को गंभीरता से लेते हुए स्वास्थ्य विभाग के निदेशालय स्तर से टीम भेजकर वहां की व्यवस्थाओं और मामलों की विस्तृत समीक्षा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं को समय पर गुणवत्तापूर्ण जांच और उपचार उपलब्ध कराया जाना सुनिश्चित किया जाए।
जरूरत के अनुसार विशेषज्ञ डॉक्टरों की भर्तीमुख्य सचिव ने कहा कि अस्पतालों में मरीजों की संख्या और उपलब्ध स्वास्थ्य सेवाओं के आधार पर डॉक्टरों की जरूरत की मैपिंग की जाए। इसके आधार पर जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी है, वहां आवश्यकतानुसार भर्ती प्रक्रिया शुरू की जाए।
उन्होंने कहा कि चिकित्सा संस्थानों में पर्याप्त मानव संसाधन उपलब्ध होने से मरीजों को समय पर बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
मॉड्यूलर ओटी के अपग्रेडेशन पर जोरमुख्य सचिव ने मेडिकल कॉलेजों में मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर (ओटी) के अपग्रेडेशन पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक अस्पताल में होने वाले ऑपरेशन के भार के अनुसार मॉड्यूलर ओटी की जरूरत का आकलन किया जाए।
जहां अतिरिक्त मॉड्यूलर ओटी की आवश्यकता है, वहां इनकी संख्या बढ़ाने की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए गए। जरूरत पड़ने पर इसके लिए केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को बजट प्रस्ताव भेजने की बात भी कही गई।
प्रसव सखी कार्यक्रम की नियमित निगरानीमुख्य सचिव ने प्रसूताओं की सुविधा के लिए संचालित प्रसव सखी कार्यक्रम को महत्वपूर्ण पहल बताया। उन्होंने इसे अस्पतालों में बेहतर तरीके से लागू करने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि गर्भवती महिला के अस्पताल पहुंचने से लेकर प्रसव और प्रसव के बाद तक उसे आवश्यक सहायता और सुविधाएं आसानी से मिलनी चाहिए। इसके लिए अस्पताल के संबंधित स्टाफ के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है। उन्होंने प्रसव सखी कार्यक्रम के तहत उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं और समन्वय की नियमित निगरानी के निर्देश दिए।
नवजात शिशु देखभाल सेवाओं की समीक्षामुख्य सचिव ने मेडिकल कॉलेजों में संचालित नियोनेटल आईसीयू (NICU) तथा जिला अस्पतालों और सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों में संचालित SNCU एवं NICU की नियमित समीक्षा करने को कहा।
उन्होंने निर्देश दिए कि इन इकाइयों में जरूरी उपकरण, दवाइयां और प्रशिक्षित स्टाफ उपलब्ध रहे। गंभीर स्थिति वाले नवजात शिशुओं को समय पर बेहतर उपचार मिले और जरूरत पड़ने पर उन्हें उच्च चिकित्सा संस्थान में रेफर करने की व्यवस्था प्रभावी हो।
उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं पर विशेष ध्यानप्रमुख शासन सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य श्रीमती गायत्री राठौड़ ने कहा कि सभी जिलों में सम्बद्ध मेडिकल कॉलेजों के विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा अन्य चिकित्सा संस्थानों के डॉक्टरों की नियमित मेंटरिंग जारी रखी जाए।
उन्होंने कहा कि उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं को चारों प्रसव पूर्व जांच समय पर मिलनी चाहिए। प्रसव के दौरान और प्रसव के बाद भी उन्हें आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जाएं। उन्होंने स्पष्ट किया कि गर्भवती महिलाओं की देखभाल में किसी भी स्तर पर गैप नहीं रहना चाहिए।
उन्होंने जरूरतमंद गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं को समय पर उच्च चिकित्सा संस्थान तक पहुंचाने के लिए रेफरल सेवाओं को मजबूत करने और उनकी लगातार निगरानी करने पर भी जोर दिया।
बैठक में मिशन निदेशक एनएचएम डॉ. जोगाराम, प्रबंध निदेशक आरएमएससीएल श्री पुखराज सैन, आयुक्त खाद्य सुरक्षा एवं औषधि नियंत्रण श्री अविचल चतुर्वेदी, मुख्य कार्यकारी अधिकारी राजस्थान हेल्थ एश्योरेंस एजेंसी श्री हरजीलाल अटल, चिकित्सा शिक्षा आयुक्त श्री बाबूलाल गोयल, निदेशक जनस्वास्थ्य डॉ. रवि प्रकाश शर्मा, निदेशक आरसीएच डॉ. मधु रतेश्वर सहित संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।