29वें राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस सम्मेलन में डिजिटल ग्राम पंचायतों पर मंथन, डेटा और AI से बदल रहा ग्रामीण प्रशासन
जयपुर: 29वें राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस सम्मेलन के तहत आयोजित ब्रेकआउट सेशन-3 में "ग्रासरूट गवर्नेंस: डिजिटल डिसेंट्रलाइजेशन, डेटा-ड्रिवन" विषय पर देशभर के प्रशासनिक अधिकारियों और विशेषज्ञों ने डिजिटल तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और स्थानीय डेटा के उपयोग से ग्राम पंचायतों में पारदर्शी, जवाबदेह और प्रभावी प्रशासन विकसित करने पर विस्तृत चर्चा की।
सत्र की अध्यक्षता पंचायती राज मंत्रालय के सचिव विवेक भारद्वाज ने की। उन्होंने कहा कि देश की लगभग 2.5 लाख ग्राम पंचायतें एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म पर वार्षिक विकास योजनाएं तैयार कर रही हैं। इन्हीं प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से विकास कार्यों की मॉनिटरिंग, डिजिटल भुगतान, लेखांकन और ऑडिट जैसी प्रक्रियाएं संचालित हो रही हैं।
उन्होंने बताया कि पंचायत एडवांसमेंट इंडेक्स के तहत करीब 150 मानकों पर पंचायतों का मूल्यांकन किया जा रहा है, जिससे उनकी कार्यप्रणाली अधिक पारदर्शी, उत्तरदायी और परिणाम आधारित बन रही है।
आंध्र प्रदेश ने पेश किया डिजिटल पंचायत मॉडल
आंध्र प्रदेश की मंडल पंचायत विकास अधिकारी मल्लेश्वरी रेड्डी ने राज्य के डिजिटल पंचायत मॉडल की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 11 विभागों को जोड़कर पंचायतों में एकीकृत सेवा प्रणाली विकसित की गई है।
उन्होंने मनमित्र व्हाट्सएप गवर्नेंस, ब्लॉकचेन आधारित डिजिटल प्रमाण-पत्र, डिजिलॉकर इंटीग्रेशन, ऑनलाइन टैक्स कलेक्शन और डेटा आधारित लाभार्थी चयन प्रणाली जैसी पहलों का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि ऑनलाइन माध्यम से एक हजार करोड़ रुपये से अधिक का कर संग्रह डिजिटल प्रशासन की बड़ी सफलता है।
गुजरात के ई-ग्राम मॉडल की भी हुई चर्चा
गुजरात सरकार के अतिरिक्त विकास आयुक्त गौरव दहिया ने राज्य के ई-ग्राम मॉडल और पंचायत एडवांसमेंट इंडेक्स की जानकारी साझा की।
उन्होंने बताया कि ई-ग्राम केंद्रों के माध्यम से ग्रामीण नागरिकों को सैकड़ों सरकारी सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। साथ ही डिजिटल कर संग्रह, ऑनलाइन भुगतान, ग्राम सुविधा पोर्टल और डिजिटल साक्षरता अभियान से पंचायतों की कार्यक्षमता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
AI आधारित भविष्य की डिजिटल गवर्नेंस
ग्रामीण विकास मंत्रालय की निदेशक (आईटी) वीएस अलागु वर्षिनी ने भविष्य की डिजिटल गवर्नेंस व्यवस्था पर प्रस्तुति देते हुए बताया कि मंत्रालय विभिन्न योजनाओं के डेटा को एकीकृत कर नागरिक-केंद्रित सेवाओं का मजबूत डिजिटल इकोसिस्टम विकसित कर रहा है।
उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), बहुभाषीय डिजिटल सेवाएं, डेटा इंटरऑपरेबिलिटी, वॉइस आधारित सेवाएं और सुरक्षित डेटा प्रबंधन को भविष्य की ग्रामीण प्रशासनिक व्यवस्था का आधार बताया।
स्थानीय नवाचारों से बेहतर हो रही सेवाएं
जिला परिषद सांगली के मुख्य कार्यकारी अधिकारी विशाल तेजराव नरवाडे ने बताया कि ग्राम पंचायतों की स्थानीय जरूरतों को ध्यान में रखते हुए विकसित डिजिटल एप्लीकेशनों से सेवा वितरण अधिक पारदर्शी, तेज और प्रभावी हुआ है।
विशेषज्ञों ने कहा कि डिजिटल तकनीक का उद्देश्य केवल सेवाओं को ऑनलाइन करना नहीं, बल्कि योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन, पारदर्शिता, जवाबदेही और नागरिक भागीदारी को बढ़ाना है। स्थानीय डेटा के वैज्ञानिक उपयोग से ग्रामीण विकास योजनाओं को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।
Golden Hind Desk