यपुर में बिना जांच बसों में लोड हो रहे पार्सल, दौसा बस अग्निकांड के बाद सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
जयपुर। दौसा जिले में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर हुए भीषण बस अग्निकांड के बाद राजस्थान में निजी यात्री बसों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। हादसे के बाद जयपुर के सिंधी कैंप बस स्टैंड पर किए गए एक जमीनी निरीक्षण में सामने आया कि कई निजी बसों की डिक्कियों में बिना किसी सुरक्षा जांच के बड़े पैमाने पर कमर्शियल पार्सल लोड किए जा रहे हैं। इससे यात्रियों की सुरक्षा को लेकर चिंता और बढ़ गई है।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दौसा हादसे में दुर्घटनाग्रस्त बस की डिक्की में बड़ी मात्रा में पार्सल और सिगरेट के कार्टन रखे गए थे। हालांकि, इस दावे की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है और जांच एजेंसियां पूरे मामले की जांच कर रही हैं। लेकिन हादसे के बाद बसों में पार्सल ढुलाई की व्यवस्था चर्चा का विषय बन गई है।
बिना जांच बसों में लोड हो रहे पार्सल
जयपुर के प्रमुख बस स्टैंड पर देखा गया कि कई निजी स्लीपर बसों की डिक्कियों में गत्ते के बॉक्स, प्लास्टिक की बोरियां और अन्य कमर्शियल पार्सल लगातार लोड किए जा रहे थे। कई बसों में यात्रियों के निजी सामान के साथ ही व्यावसायिक सामान भी एक साथ रखा जा रहा था।
सबसे चिंताजनक बात यह रही कि इन पार्सलों की किसी प्रकार की सुरक्षा जांच, स्क्रीनिंग या सत्यापन की व्यवस्था मौके पर दिखाई नहीं दी। सामान में क्या है, वह ज्वलनशील है या नहीं, इसकी जांच किए बिना ही उसे बस की डिक्की में रख दिया जा रहा था।
यात्रियों को नहीं होती जानकारी
अधिकांश यात्रियों को यह भी जानकारी नहीं होती कि जिस डिक्की में उनका सामान रखा गया है, उसी में कमर्शियल पार्सल भी बड़ी मात्रा में ले जाए जा रहे हैं। यदि किसी पार्सल में ज्वलनशील या प्रतिबंधित सामग्री हो, तो किसी दुर्घटना की स्थिति में आग फैलने का खतरा कई गुना बढ़ सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यात्री बसों में पार्सल परिवहन के लिए स्पष्ट सुरक्षा मानकों का पालन आवश्यक है, ताकि यात्रियों की जान जोखिम में न पड़े।
प्रशासनिक निगरानी पर उठे सवाल
स्थानीय स्तर पर यह भी सवाल उठ रहे हैं कि निजी बसों में लोड होने वाले कमर्शियल सामान की निगरानी कौन कर रहा है। क्या ऐसे पार्सलों की जांच के लिए कोई निर्धारित व्यवस्था है? क्या ज्वलनशील या खतरनाक सामग्री की पहचान की जाती है? यदि नहीं, तो यह व्यवस्था भविष्य में बड़े हादसों का कारण बन सकती है।
दौसा हादसे के बाद बढ़ी चिंता
दौसा बस हादसे ने एक बार फिर यात्री सुरक्षा को लेकर गंभीर बहस छेड़ दी है। परिवहन विशेषज्ञों का कहना है कि बसों में पार्सल ढुलाई पर स्पष्ट दिशा-निर्देशों का पालन, सुरक्षा जांच और नियमित निरीक्षण आवश्यक है। इससे न केवल हादसों का जोखिम कम होगा बल्कि यात्रियों का भरोसा भी मजबूत होगा।
फिलहाल दौसा हादसे की जांच जारी है और प्रशासन की रिपोर्ट के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि दुर्घटना के पीछे वास्तविक कारण क्या थे। वहीं, बसों में बिना जांच पार्सल लोड होने की व्यवस्था पर भी सख्त निगरानी और नियमों के पालन की मांग तेज हो रही है।
Golden Hind Desk