राजस्थान में UCC और ट्री प्रोटेक्शन बिल को कैबिनेट की मंजूरी, विधानसभा सत्र में होंगे पेश; 60 दिन में विवाह पंजीकरण अनिवार्य
राजस्थान की भजन लाल शर्मा सरकार ने गुरुवार को हुई मंत्रिमंडल की बैठक में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए। मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा की अध्यक्षता में हुई बैठक में पर्यावरण संरक्षण, समान नागरिक कानून, ग्रामीण जलापूर्ति, पूर्व सैनिकों के परिवारों, सरकारी कर्मचारियों और जनजातीय क्षेत्र से जुड़े कई प्रस्तावों को मंजूरी दी गई।
कैबिनेट के सबसे महत्वपूर्ण फैसलों में राजस्थान वृक्ष (संरक्षण) विधेयक-2026 और राजस्थान समान नागरिक संहिता विधेयक-2026 के प्रारूप को मंजूरी देना शामिल है। दोनों विधेयकों को आगामी राजस्थान विधानसभा सत्र में पेश किया जाएगा। समान नागरिक संहिता विधेयक में विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, भरण-पोषण और लिव-इन रिलेशनशिप से संबंधित प्रावधान प्रस्तावित किए गए हैं, जबकि वृक्ष संरक्षण विधेयक का उद्देश्य गैर-वन भूमि पर महत्वपूर्ण पेड़ प्रजातियों की अवैध कटाई पर रोक लगाना है।
29 महत्वपूर्ण पेड़ प्रजातियों को मिलेगा संरक्षण
राजस्थान सरकार ने पर्यावरण और जैव विविधता के संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए राजस्थान वृक्ष (संरक्षण) विधेयक-2026 के ड्राफ्ट को मंजूरी दी है। संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल के अनुसार यह विधेयक आगामी विधानसभा सत्र में पेश किया जाएगा।
प्रस्तावित कानून के तहत राज्य में 29 महत्वपूर्ण वृक्ष प्रजातियों को विशेष संरक्षण दिया जाएगा। इनमें राजस्थान का राज्य वृक्ष खेजड़ी (Prosopis cineraria), रोहिड़ा, बरगद, पीपल, लासोड़ा, तेंदू, महुआ, कैर और चिरौंजी जैसी प्रजातियां शामिल हैं।
खेजड़ी राजस्थान के रेगिस्तानी और ग्रामीण क्षेत्रों के पारिस्थितिक तंत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसी तरह कई अन्य पेड़ ग्रामीण और आदिवासी समुदायों की आजीविका से जुड़े हुए हैं।
पेड़ काटने पर एक लाख रुपये तक जुर्माना
प्रस्तावित विधेयक में गैर-वन भूमि पर संरक्षित पेड़ों की कटाई को नियंत्रित करने के लिए कड़े प्रावधान किए गए हैं। किसी व्यक्ति को अपनी स्वामित्व या कब्जे वाली भूमि पर भी निर्धारित पेड़ को काटने या कटवाने से पहले सक्षम प्राधिकारी से अनुमति लेनी होगी।
बिना अनुमति पेड़ काटने पर अपराध को संज्ञेय और जमानतीय बनाया गया है। दोष सिद्ध होने पर एक वर्ष तक की जेल या एक लाख रुपये तक जुर्माना अथवा दोनों की सजा हो सकती है।
यदि सक्षम प्राधिकारी की अनुमति से किसी पेड़ को काटा जाता है, तो उसके बदले निर्धारित संख्या में नए पेड़ उसी क्षेत्र में लगाना अनिवार्य होगा। सरकार का मानना है कि इससे पेड़ संरक्षण के साथ-साथ ग्रामीण, आदिवासी और रेगिस्तानी क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था को भी लाभ मिलेगा।
राजस्थान UCC Bill 2026 को कैबिनेट की मंजूरी
राजस्थान कैबिनेट ने राजस्थान समान नागरिक संहिता विधेयक-2026 के प्रारूप को भी मंजूरी दी है। यह विधेयक संविधान के अनुच्छेद 44 की भावना के अनुरूप तैयार किया गया है।
इसका मुख्य उद्देश्य राज्य में विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, भरण-पोषण और लिव-इन संबंधों से संबंधित मामलों के लिए एक समान, पारदर्शी और व्यवस्थित कानूनी ढांचा तैयार करना है।
विधेयक का प्रारूप सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में गठित विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों के आधार पर तैयार किया गया है।
हालांकि, प्रस्तावित UCC के प्रावधान अनुसूचित जनजातियों (ST) पर लागू नहीं होंगे। संविधान के तहत संरक्षित पारंपरिक अधिकारों वाले समुदायों को भी इसके दायरे से बाहर रखा गया है।
60 दिनों के भीतर विवाह का पंजीकरण
UCC Bill के प्रस्तावित प्रावधानों के अनुसार कानून लागू होने के बाद होने वाले सभी विवाहों का 60 दिनों के भीतर पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा।
विवाह की धार्मिक और पारंपरिक प्रक्रियाओं पर रोक नहीं होगी। अलग-अलग धर्म और समुदाय अपनी परंपराओं के अनुसार विवाह कर सकेंगे। इसमें सप्तपदी, निकाह, आनंद कारज और होली यूनियन जैसी परंपराएं शामिल हैं।
विधेयक में बहुविवाह पर रोक का भी प्रावधान किया गया है।
महत्वपूर्ण बात यह है कि केवल विवाह का पंजीकरण नहीं होने या पंजीकरण में देरी होने से विवाह स्वतः अमान्य नहीं माना जाएगा।
पंजीकरण में देरी पर जुर्माना
विवाह या तलाक के पंजीकरण के लिए आवेदन मिलने के बाद रजिस्ट्रार को 15 दिनों के भीतर प्रमाण-पत्र जारी करना होगा। यदि आवेदन अस्वीकार किया जाता है तो उसके कारण लिखित रूप में बताने होंगे।
रजिस्ट्रार के निर्णय के खिलाफ 30 दिनों के भीतर रजिस्ट्रार जनरल के समक्ष अपील की जा सकेगी। अपील का निपटारा 60 दिनों के भीतर करने का प्रावधान प्रस्तावित है।
विवाह का पंजीकरण नहीं कराने पर 10 हजार रुपये तक जुर्माना लगाया जा सकता है। नोटिस मिलने के बाद भी पंजीकरण नहीं कराने पर यह जुर्माना बढ़कर 25 हजार रुपये तक हो सकता है।
यदि कोई रजिस्ट्रार जानबूझकर पंजीकरण प्रक्रिया में देरी या लापरवाही करता है तो रजिस्ट्रार जनरल उस पर भी 25 हजार रुपये तक का जुर्माना लगा सकता है।
बेटे और बेटियों को संपत्ति में समान अधिकार
प्रस्तावित समान नागरिक संहिता में उत्तराधिकार को लेकर भी महत्वपूर्ण प्रावधान हैं। इसके तहत बेटे और बेटियों को समान उत्तराधिकार अधिकार दिए जाएंगे।
यदि किसी व्यक्ति की मृत्यु बिना वसीयत के होती है तो उसकी संपत्ति निर्धारित प्राथमिकता के अनुसार कानूनी उत्तराधिकारियों में वितरित होगी।
पहली श्रेणी में जीवित जीवनसाथी, बच्चे, मृत बच्चों के जीवनसाथी और बच्चे तथा माता-पिता जैसे उत्तराधिकारी शामिल होंगे। दूसरी श्रेणी में सौतेले माता-पिता, भाई-बहन, मृत भाई-बहनों के जीवनसाथी एवं बच्चे, माता-पिता के भाई-बहन तथा दादा-दादी और नाना-नानी शामिल होंगे।
यदि इन श्रेणियों में कोई कानूनी उत्तराधिकारी नहीं मिलता तो संपत्ति सरकार के पास जाएगी। हालांकि संपत्ति से जुड़ी देनदारियां और कानूनी दायित्व भी सरकार पर लागू होंगे।
मृत्यु के समय गर्भ में मौजूद बच्चा यदि बाद में जीवित पैदा होता है तो उसे भी पूर्ण उत्तराधिकार अधिकार दिए जाएंगे।
लिव-इन संबंधों के लिए भी कानूनी व्यवस्था
UCC Bill में लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े मामलों को भी शामिल किया गया है। लिव-इन संबंध शुरू करने और समाप्त करने की सूचना या पंजीकरण की व्यवस्था प्रस्तावित है।
इसका उद्देश्य लिव-इन संबंध में रहने वाले दोनों पक्षों के अधिकारों की रक्षा करना और विवाद की स्थिति में कानूनी व्यवस्था उपलब्ध कराना है।
विधेयक में विवाह से संबंधित विवादों के समाधान के लिए न्यायिक प्रक्रिया का भी प्रावधान है। जबरदस्ती, धोखाधड़ी से सहमति प्राप्त करने और अन्य निर्धारित परिस्थितियों में विवाह को शून्य घोषित करने का अधिकार न्यायालय को होगा।
ग्रामीण क्षेत्रों में जलापूर्ति के लिए नई नीति
कैबिनेट ने ग्रामीण क्षेत्रों में नियमित और स्वच्छ नल जलापूर्ति सुनिश्चित करने के लिए ऑपरेशंस एंड मेंटेनेंस पॉलिसी को मंजूरी दी है।
इस नीति में जल जीवन मिशन 2.0 के 19 प्रमुख घटकों को शामिल किया गया है। ग्राम पंचायत, ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति, क्लस्टर, ब्लॉक, जिला और राज्य स्तर पर जलापूर्ति योजनाओं के संचालन और निगरानी की व्यवस्था की जाएगी।
5-6 ग्राम पंचायतों के समूह के लिए क्लस्टर समितियां बनाई जाएंगी। PHED और राजस्थान वाटर सप्लाई एंड सीवरेज कॉरपोरेशन प्रमुख सेवा प्रदाता संस्थाओं के रूप में काम करेंगे।
1971 युद्ध के 35 शहीदों के परिवारों को नौकरी
कैबिनेट ने 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में घायल होने के बाद वर्ष 1972 में शहीद हुए राजस्थान के 35 सैनिकों के परिवारों को भी अनुकंपा नियुक्ति का लाभ देने का निर्णय लिया है।
इसके लिए संबंधित नियमों में संशोधन किया गया है। पात्र परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी मिल सकेगी।
सरकारी कर्मचारियों के लिए कई राहत
कैबिनेट ने वर्ष 2026-27 में सरकारी कर्मचारियों की पदोन्नति के लिए आवश्यक अनुभव में दो वर्ष की छूट देने का निर्णय लिया है। यह लाभ केवल उन कर्मचारियों को मिलेगा जिन्हें पिछले तीन वर्षों में यह सुविधा नहीं मिली थी।
इसके अलावा मृत सरकारी कर्मचारी की बहू को भी अनुकंपा नियुक्ति के लिए पात्र आश्रित के रूप में शामिल किया गया है।
प्रशिक्षण के दौरान या प्रशिक्षण पूरा होने के दो वर्ष के भीतर इस्तीफा देने वाले कर्मचारियों से वेतन और भत्तों की वसूली नहीं की जाएगी। सामान्य स्थिति में केवल प्रशिक्षण की लागत की वसूली होगी।
राज्य सरकार या केंद्र सरकार के किसी अन्य विभाग या उपक्रम में नई नियुक्ति के कारण इस्तीफा देने पर प्रशिक्षण खर्च की भी वसूली नहीं होगी।
एकल महिला सरकारी कर्मचारियों को Child Care Leave एक वर्ष में तीन के बजाय छह बार लेने की अनुमति होगी। सरोगेसी के मामले में सरोगेट मां को 180 दिन और commissioning mother को 90 दिन का मातृत्व अवकाश देने का प्रावधान किया गया है।
470 हॉस्टल अधीक्षक पदों पर भर्ती
जनजाति क्षेत्र विकास विभाग में सरकारी आवासीय विद्यालयों और छात्रावासों के लिए 470 हॉस्टल अधीक्षक ग्रेड-II पदों पर भर्ती का रास्ता साफ किया गया है। इनमें 254 महिला हॉस्टल अधीक्षक के पद शामिल हैं।
इन पदों को राजस्थान अधीनस्थ एवं मंत्रालयिक सेवा चयन के कॉमन एलिजिबिलिटी टेस्ट के माध्यम से भरा जा सकेगा।
उद्योग और अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं के लिए भूमि
कैबिनेट ने जैसलमेर में लगभग 306 हेक्टेयर औद्योगिक भूमि अल्ट्राटेक सीमेंट लिमिटेड को आवंटित करने को मंजूरी दी है।
इसके साथ ही बीकानेर और जैसलमेर सहित विभिन्न क्षेत्रों में सौर और सोलर-विंड हाइब्रिड परियोजनाओं के लिए भूमि आवंटन को भी मंजूरी दी गई है।
इसके अलावा जैसलमेर जिले में एस्केप रिजर्वायर के निर्माण से प्रभावित 21 किसानों को उसी गांव में भूमि आवंटित करने का फैसला लिया गया है। लगभग 722 बीघा भूमि से जुड़े इस पुराने विवाद के समाधान के लिए सरकार ने विशेष मामले के रूप में यह मंजूरी दी है।
निष्कर्ष
राजस्थान कैबिनेट के इन फैसलों में UCC Bill 2026 और Rajasthan Trees Protection Bill 2026 सबसे प्रमुख हैं। UCC के जरिए विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, भरण-पोषण और लिव-इन संबंधों के लिए एक समान कानूनी ढांचा प्रस्तावित किया गया है, जबकि वृक्ष संरक्षण विधेयक खेजड़ी सहित 29 महत्वपूर्ण पेड़ प्रजातियों को कानूनी संरक्षण देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
दोनों विधेयकों को आगामी विधानसभा सत्र में पेश किए जाने के बाद इनके प्रावधानों पर चर्चा होगी और आगे की विधायी प्रक्रिया शुरू होगी।
GOLDEN HIND DESK