डोटासरा के RAS चयन पर फिर विवाद

डोटासरा पर फिर RAS भर्ती को लेकर सवाल, विश्वेंद्र सिंह ने जांच की मांग की

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डोटासरा पर फिर उठे RAS भर्ती को लेकर सवाल, विश्वेंद्र सिंह ने लगाए गंभीर आरोप; जांच की मांग

 राजस्थान कांग्रेस की राजनीति में RAS भर्ती परीक्षा से जुड़ा पुराना विवाद एक बार फिर चर्चा में आ गया है। पूर्व मंत्री और कांग्रेस नेता विश्वेंद्र सिंह ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा कर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। विश्वेंद्र सिंह ने अपने पोस्ट में RAS-2016 और RAS-2018 में डोटासरा के रिश्तेदारों के चयन, इंटरव्यू में मिले अंकों और कथित OBC प्रमाण पत्र को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने मामले की गहन जांच और कार्रवाई की मांग की है।

विश्वेंद्र सिंह ने अपनी पोस्ट की शुरुआत “श्रीमान डोटासरा जी की हकीकत” शीर्षक से की। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 2018 में हुई भर्ती प्रक्रिया के दौरान डोटासरा की पुत्रवधू प्रतिभा पूनिया तथा उनके भाई-बहन गौरव पूनिया और प्रभा पूनिया को इंटरव्यू में समान 80-80 अंक दिए गए। उन्होंने इसे गंभीर संदेह का विषय बताते हुए जांच की मांग की है।

हालांकि, ये आरोप विश्वेंद्र सिंह के सोशल मीडिया पोस्ट में लगाए गए हैं। उपलब्ध सार्वजनिक रिपोर्टों के अनुसार, प्रतिभा पूनिया का RAS-2016 और गौरव व प्रभा पूनिया का RAS-2018 में चयन हुआ था तथा इंटरव्यू में 80-80 अंक मिलने को लेकर वर्ष 2021 में भी राजनीतिक विवाद हुआ था। उस समय गोविंद सिंह डोटासरा ने आरोपों को खारिज करते हुए चयन प्रक्रिया को लेकर अपना पक्ष रखा था।

RAS-2016 और 2018 के चयन पर उठाए सवाल

विश्वेंद्र सिंह ने अपने पोस्ट में कहा कि प्रतिभा पूनिया का चयन RAS-2016 में हुआ था, जबकि गौरव पूनिया और प्रभा पूनिया RAS-2018 में चयनित हुए। उनका आरोप है कि तीनों को इंटरव्यू में समान 80-80 अंक दिए गए।

इस मामले को लेकर पहले भी सार्वजनिक रूप से सवाल उठ चुके हैं। वर्ष 2021 में प्रकाशित रिपोर्टों में बताया गया था कि प्रतिभा पूनिया, गौरव पूनिया और प्रभा पूनिया को इंटरव्यू में 80 अंक मिले थे। उसी दौरान इस समानता को लेकर विपक्षी नेताओं ने सवाल उठाए थे।

दूसरी ओर, उस समय डोटासरा की ओर से इन आरोपों को राजनीतिक और सोशल मीडिया से जुड़ा विवाद बताया गया था। रिपोर्टों के अनुसार उनका कहना था कि चयनित अभ्यर्थी योग्य थे और केवल पारिवारिक संबंधों के आधार पर चयन पर सवाल नहीं उठाया जाना चाहिए।

OBC प्रमाण पत्र को लेकर भी आरोप

विश्वेंद्र सिंह ने अपने पोस्ट में RAS चयन के साथ-साथ OBC प्रमाण पत्र को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि डोटासरा के पुत्र अविनाश सिंह तथा उनके समधी रमेश चंद पूनिया के बच्चों को OBC प्रमाण पत्र के जरिए लाभ दिलाया गया।

विश्वेंद्र सिंह ने दावा किया कि इस मामले की जांच की जानी चाहिए ताकि यह स्पष्ट हो सके कि संबंधित अभ्यर्थियों को OBC आरक्षण का लाभ नियमों के अनुसार मिला था या नहीं।

यह मुद्दा भी वर्ष 2026 में फिर राजनीतिक चर्चा में आया है। जून 2026 में राजस्थान के मंत्री किरोड़ी लाल मीणा ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर डोटासरा और उनके परिवार से जुड़े लोगों के RAS चयन तथा OBC प्रमाण पत्रों को लेकर जांच और FIR की मांग की थी। रिपोर्टों के अनुसार, मीणा ने भी क्रीमीलेयर नियमों और कथित प्रमाण पत्रों को लेकर सवाल उठाए थे।

हालांकि, इन आरोपों को भी आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए। उपलब्ध स्रोतों में डोटासरा पक्ष की ओर से इन आरोपों को खारिज करने और चयनित अभ्यर्थियों की योग्यता का बचाव करने की बात सामने आती है। इसलिए किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए आधिकारिक जांच या सक्षम प्राधिकारी के निष्कर्ष महत्वपूर्ण होंगे।

REET को लेकर भी डोटासरा पर निशाना

विश्वेंद्र सिंह ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में केवल RAS चयन का मुद्दा नहीं उठाया, बल्कि डोटासरा के शिक्षा मंत्री रहने के दौरान हुई REET परीक्षा को लेकर भी सवाल उठाए।

उन्होंने आरोप लगाया कि REET परीक्षा में कथित गड़बड़ी के कारण गरीब और मेहनतकश युवाओं के भविष्य पर असर पड़ा। विश्वेंद्र सिंह ने वर्तमान सरकार और मुख्यमंत्री से अपील करते हुए कहा कि डोटासरा के खिलाफ लगाए गए आरोपों की गहनता से जांच की जानी चाहिए।

REET को लेकर राजस्थान में पहले भी लंबे समय तक राजनीतिक विवाद रहा है। विभिन्न राजनीतिक दलों की ओर से परीक्षा में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक को लेकर आरोप लगाए गए थे।

विश्वेंद्र सिंह ने अपने पोस्ट में कहा कि यदि किसी परीक्षा या भर्ती प्रक्रिया में अनियमितता हुई है तो इसकी जांच कर जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। उन्होंने इसे युवाओं के भविष्य से जुड़ा विषय बताया।

भरतपुर दौरे के बयान का भी जिक्र

विश्वेंद्र सिंह ने अपने पोस्ट में डोटासरा के एक कार्यक्रम में दिए गए कथित बयान का भी उल्लेख किया है। पोस्ट के अनुसार, डोटासरा ने पूर्व मुख्यमंत्री कुंवरज सपा जी के मूर्ति अनावरण कार्यक्रम के दौरान कहा था कि “भरतपुर में तो रास्ता पूछने के भी पैसे ले लेते हैं।”

विश्वेंद्र सिंह ने इस कथित टिप्पणी पर आपत्ति जताते हुए कहा कि भरतपुर की जनता के लिए इस तरह का बयान उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि डोटासरा जब भरतपुर आएंगे तो उन्हें रास्ता बताया जाएगा।

इसके साथ ही उन्होंने पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. चंद्रभान के साथ डोटासरा के स्वागत-सत्कार की बात भी अपने पोस्ट में कही।

डोटासरा के इस्तीफे की मांग

विश्वेंद्र सिंह ने अपने पोस्ट के अंत में डोटासरा के खिलाफ राजनीतिक कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने लिखा कि ऐसे आरोपों से घिरे नेताओं को तत्काल प्रभाव से अपना इस्तीफा दे देना चाहिए अथवा कांग्रेस पार्टी के आलाकमान को उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए पार्टी से निकाल देना चाहिए।

यह मांग विश्वेंद्र सिंह की राजनीतिक राय और आरोपों का हिस्सा है। किसी नेता के इस्तीफे या पार्टी कार्रवाई का निर्णय संबंधित राजनीतिक दल और उसके संगठनात्मक नेतृत्व के अधिकार क्षेत्र में आता है।

2026 में फिर गरमाया पुराना RAS विवाद

RAS भर्ती से जुड़ा यह विवाद नया नहीं है। 2021 में भी डोटासरा के परिवार से जुड़े तीन अभ्यर्थियों के चयन और इंटरव्यू में मिले अंकों को लेकर राजस्थान की राजनीति में काफी चर्चा हुई थी। उस समय उपलब्ध रिपोर्टों में प्रतिभा पूनिया के RAS-2016 तथा गौरव और प्रभा पूनिया के RAS-2018 में चयन का उल्लेख किया गया था।

वर्ष 2026 में मंत्री किरोड़ी लाल मीणा की ओर से मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र के बाद यह मुद्दा फिर सुर्खियों में आया। मीणा ने चयन प्रक्रिया और OBC प्रमाण पत्र को लेकर गंभीर आरोप लगाते हुए जांच की मांग की।

अब विश्वेंद्र सिंह की सोशल मीडिया पोस्ट के बाद यह विवाद एक बार फिर राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गया है।

आरोपों की जांच से ही स्थिति होगी स्पष्ट

मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि RAS चयन, इंटरव्यू में मिले अंकों और OBC प्रमाण पत्रों को लेकर लगाए जा रहे आरोपों की आधिकारिक जांच किस स्तर पर होती है। किसी भी भर्ती प्रक्रिया में यदि अनियमितता के आरोप लगते हैं तो दस्तावेजों, परीक्षा रिकॉर्ड, प्रमाण पत्र और संबंधित अधिकारियों के निर्णयों की जांच के बाद ही तथ्यात्मक स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

उपलब्ध सार्वजनिक रिपोर्टों में आरोप लगाने वाले नेताओं के बयान और डोटासरा की ओर से पहले दिए गए स्पष्टीकरण दोनों दर्ज हैं। इसलिए इस पूरे मामले में राजनीतिक आरोपों और प्रमाणित तथ्यों के बीच अंतर बनाए रखना जरूरी है।

फिलहाल विश्वेंद्र सिंह ने मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेतृत्व से मामले की जांच तथा कार्रवाई की मांग की है। दूसरी ओर, डोटासरा से जुड़े पुराने विवाद में उनका पक्ष यह रहा है कि चयनित अभ्यर्थी योग्य थे और चयन को केवल पारिवारिक संबंधों के आधार पर संदेह की नजर से नहीं देखा जाना चाहिए।

 इस खबर में RAS, OBC प्रमाण पत्र और REET से संबंधित आरोपों को संबंधित नेताओं के बयान/पोस्ट के रूप में प्रस्तुत किया गया है। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई है। किसी सक्षम जांच एजेंसी या न्यायिक प्राधिकारी का अंतिम निष्कर्ष उपलब्ध होने पर ही आरोपों की तथ्यात्मक स्थिति तय होगी।

GOLDEN HIND DESK