जयपुर: राजस्थान में कांग्रेस पार्टी ने केंद्र सरकार के खिलाफ “मनरेगा बचाओ संग्राम” नाम से राज्यव्यापी आंदोलन शुरू करने की घोषणा की है। कांग्रेस का आरोप है कि केंद्र सरकार महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को कमजोर करने की साजिश कर रही है और इसके अधिकारों को धीरे-धीरे सीमित किया जा रहा है। यह अभियान 10 जनवरी से पूरे प्रदेश में चलाया जाएगा।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि मनरेगा ग्रामीण गरीबों, मजदूरों और किसानों के लिए आजीविका की सबसे बड़ी गारंटी योजना है, लेकिन केंद्र सरकार बजट में कटौती, भुगतान में देरी और नियमों में बदलाव के जरिए इस योजना को अप्रभावी बनाने की कोशिश कर रही है। पार्टी का दावा है कि इससे गांवों में बेरोजगारी बढ़ रही है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक असर पड़ रहा है।
ग्रामीण इलाकों में जनजागरण
“मनरेगा बचाओ संग्राम” के तहत कांग्रेस कार्यकर्ता गांव-गांव जाकर जनजागरण अभियान चलाएंगे।
-
ग्रामीण मजदूरों को उनके अधिकारों की जानकारी दी जाएगी
-
मनरेगा में काम के दिनों, मजदूरी भुगतान और जॉब कार्ड से जुड़े मुद्दों को उठाया जाएगा
-
पंचायत स्तर पर धरना-प्रदर्शन और ज्ञापन सौंपे जाएंगे
कांग्रेस का कहना है कि यह आंदोलन केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि ग्रामीण जनता के हक की लड़ाई है।
केंद्र बनाम कांग्रेस
कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि केंद्र सरकार ने मनरेगा के लिए पर्याप्त फंड नहीं दिया, जिससे राज्यों में मजदूरी भुगतान अटका हुआ है। वहीं, भाजपा और केंद्र सरकार पहले ही कह चुकी है कि मनरेगा में पारदर्शिता और तकनीकी सुधार किए जा रहे हैं और किसी भी श्रमिक का अधिकार नहीं छीना जा रहा।
राजनीतिक मायने
राजनीतिक जानकारों के अनुसार, मनरेगा हमेशा से ग्रामीण राजनीति का बड़ा मुद्दा रहा है। राजस्थान जैसे राज्य में, जहां बड़ी आबादी गांवों में रहती है, यह आंदोलन राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है। आने वाले पंचायत और स्थानीय चुनावों से पहले कांग्रेस का यह अभियान सरकार पर दबाव बनाने की रणनीति के रूप में भी देखा जा रहा है।
कुल मिलाकर, “मनरेगा बचाओ संग्राम” से राजस्थान की राजनीति में आने वाले दिनों में गर्माहट बढ़ने की पूरी संभावना है, क्योंकि सत्ता और विपक्ष आमने-सामने दिखाई दे रहे हैं।