तीन विधायक फिर Ethics Committee के सामने पेश

MLA LAD फंड में कमीशन के आरोप, बजट सत्र में आ सकता है बड़ा फैसला

टूजी

जयपुर: राजस्थान विधानसभा की एथिक्स कमेटी (Ethics Committee) के सामने एक बार फिर तीन विधायक पेश हुए हैं। इन विधायकों पर आरोप है कि इन्होंने विधायक स्थानीय क्षेत्र विकास निधि (MLA LAD Fund) के कार्यों के आवंटन में कथित तौर पर कमीशन की मांग की थी। यह मामला एक स्थानीय समाचार पत्र द्वारा की गई स्टिंग रिपोर्ट के सामने आने के बाद उजागर हुआ था।

एथिक्स कमेटी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित विधायकों को दोबारा बुलाया और उनसे पूरे प्रकरण पर स्पष्टीकरण मांगा।

ये विधायक हुए पेश

एथिक्स कमेटी के समक्ष पेश होने वाले विधायकों में शामिल हैं—

  • रेवंत राम डांगा (भारतीय जनता पार्टी)

  • अनीता जाटव (कांग्रेस)

  • रितु बनावत (निर्दलीय)

तीनों विधायकों ने समिति के सामने लगाए गए आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है और खुद को निर्दोष बताया है।

आरोपों से किया इनकार, दस्तावेज़ किए पेश

सूत्रों के अनुसार, तीनों विधायकों ने एथिक्स कमेटी के समक्ष अपने पक्ष में लिखित जवाब और संबंधित दस्तावेज़ प्रस्तुत किए हैं। विधायकों का कहना है कि स्टिंग रिपोर्ट भ्रामक और तथ्यों से परे है तथा इसे उनकी छवि खराब करने के उद्देश्य से प्रसारित किया गया।

विधायकों ने यह भी तर्क दिया कि MLA LAD फंड से जुड़े सभी कार्य नियमानुसार स्वीकृत किए गए हैं और किसी प्रकार की अवैध मांग या लेन-देन नहीं हुआ।

क्या है पूरा मामला

दरअसल, कुछ समय पहले एक स्थानीय अख़बार में प्रकाशित स्टिंग रिपोर्ट में दावा किया गया था कि कुछ विधायक LAD फंड से होने वाले विकास कार्यों के बदले ठेकेदारों से कमीशन की मांग कर रहे हैं। रिपोर्ट सामने आने के बाद यह मामला राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया।

इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष के निर्देश पर मामला एथिक्स कमेटी को सौंपा गया, जिसने जांच प्रक्रिया शुरू की।

अब आगे क्या?

एथिक्स कमेटी अब पूरे मामले पर कानूनी सलाह ले रही है। इसके बाद समिति अपनी अंतिम रिपोर्ट तैयार कर राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष को सौंपेगी।
सूत्रों की मानें तो यह रिपोर्ट आगामी बजट सत्र के दौरान सदन में पेश की जा सकती है।

सियासी हलचल तेज

इस मामले को लेकर राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है।

  • विपक्ष इसे भ्रष्टाचार से जोड़कर सरकार पर हमला कर रहा है

  • वहीं सत्तापक्ष का कहना है कि जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना गलत होगा

अगर एथिक्स कमेटी की रिपो