कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री भरत सिंह कुंदनपुर का सोमवार की रात SMS हॉस्पिटल में निधन हो गया | भरत सिंह कुछ दिनों से बीमार थे और उनका इलाज़ SMS हॉस्पिटल में चल रहा था | कांग्रेस देहात जिलाध्यक्ष भानुप्रताप सिंह ने बताया कि उनका अंतिम संस्कार मंगलवार दोपहर को उनके पैतृक गांव कुंदनपुर में किया जाएगा। भरत सिंह अपनी सादगी और सरल स्वभाव के लिए जाने जाते थे | भरत सिंह पहले खानपुर से, फिर दीगोद से, और दो बार सांगोद विधानसभा क्षेत्र से विधायक रह चुके थे | उन्होंने राजनीति की शुरुआत एक सरपंच के रूप में की और पंचायतीराज मंत्री तक पहुंचे। वे हमेशा आम लोगों के बीच रहना पसंद करते थे इसलिए उन्होंने बाद में पंच का चुनाव लड़ा और जीतकर जनता की सेवा जारी रखी। 2023 में उन्होंने विधानसभा चुनाव न लड़ने का ऐलान किया था। अपने आखिरी पत्र में जनता, समर्थकों और आलोचकों का धन्यवाद करते हुए राजनीति से संन्यास की घोषणा की और कहा कि अब वरिष्ठ नेताओं को युवाओं को मौका देना चाहिए।
पूर्व मंत्री भरत सिंह कुंदनपुर का निधन !
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री भरत सिंह कुंदनपुर का सोमवार की रात SMS हॉस्पिटल में निधन हो गया
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कांग्रेस में नया ताकतवर गठबंधन, डोटासरा–टीकाराम जूली की जोड़ी से संगठन को मिली नई धार
राजस्थान: राजस्थान कांग्रेस की राजनीति में एक नया और ताकतवर गठबंधन उभरकर सामने आया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली की जोड़ी पार्टी संगठन को फिर से मजबूत करने में अहम भूमिका निभा रही है। संगठनात्मक फैसलों से लेकर सदन और सड़क तक, दोनों नेताओं की रणनीति को पार्टी के भीतर सकारात्मक रूप से देखा जा रहा है।
संगठन में दिख रही नई सक्रियतापिछले कुछ महीनों में कांग्रेस संगठन में जो सक्रियता नजर आई है, उसके पीछे डोटासरा और जूली की साझा रणनीति मानी जा रही है। जिला स्तर पर नियुक्तियों, कार्यकर्ताओं की बैठकों और आंदोलनात्मक कार्यक्रमों में समन्वय साफ दिखाई दे रहा है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, लंबे समय बाद कांग्रेस में निर्णय लेने की प्रक्रिया अधिक संगठित और स्पष्ट हुई है।
सदन में सरकार पर आक्रामक रुखविधानसभा के भीतर टीकाराम जूली ने नेता प्रतिपक्ष के रूप में सरकार को बेरोजगारी, कानून-व्यवस्था, भर्ती परीक्षाओं और महंगाई जैसे मुद्दों पर लगातार घेरा है। वहीं, प्रदेश अध्यक्ष डोटासरा संगठन के माध्यम से इन मुद्दों को जनता तक पहुंचाने का काम कर रहे हैं। इससे कांग्रेस को एक साथ सड़क और सदन दोनों मोर्चों पर मजबूती मिली है।
लोकसभा चुनावों में भूमिका को मिली सराहनालोकसभा चुनावों के दौरान भी डोटासरा–जूली की जोड़ी की रणनीति की पार्टी के भीतर सराहना की जा रही है। चुनावी प्रबंधन, उम्मीदवार चयन पर फीडबैक और जमीनी कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने में दोनों नेताओं की भूमिका को अहम माना गया। कांग्रेस नेतृत्व का मानना है कि राजस्थान में पार्टी का प्रदर्शन बेहतर बनाने में यह समन्वय निर्णायक साबित हुआ।
गुटबाजी से ऊपर उठने की कोशिशराजस्थान कांग्रेस लंबे समय से गुटबाजी की राजनीति से जूझती रही है। ऐसे में डोटासरा और जूली की जोड़ी को गुटों से ऊपर उठकर संगठन को एकजुट करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि यदि यह तालमेल बरकरार रहता है तो कांग्रेस आगामी विधानसभा चुनावों में मजबूत विकल्प बनकर उभर सकती है।
केंद्रीय नेतृत्व की भी नजरसूत्रों के अनुसार, कांग्रेस का केंद्रीय नेतृत्व भी राजस्थान में उभर रहे इस नए पावर सेंटर पर नजर बनाए हुए है। संगठनात्मक मजबूती और विपक्ष की भूमिका को देखते हुए दोनों नेताओं को भविष्य में और बड़ी जिम्मेदारियां मिलने की अटकलें भी लगाई जा रही हैं।
निष्कर्षडोटासरा और टीकाराम जूली की जोड़ी ने राजस्थान कांग्रेस को एक नई दिशा देने की कोशिश शुरू कर दी है। संगठनात्मक मजबूती, आक्रामक विपक्ष और चुनावी रणनीति के संतुलन ने पार्टी में नई ऊर्जा भरी है। आने वाले समय में यह गठबंधन कांग्रेस की सियासत को किस दिशा में ले जाता है, इस पर पूरे प्रदेश की नजरें टिकी रहेंगी।
सीएम भजनलाल का कांग्रेस पर तीखा हमला, बोले— 400 लोग जेल में, तय करे कांग्रेस ‘छोटी मछली’ है या ‘बड़ा मगरमच्छ’
जयपुर: राजस्थान की राजनीति में एक बार फिर तीखा सियासी टकराव देखने को मिला है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कांग्रेस पर जोरदार हमला बोलते हुए भ्रष्टाचार, पेपर लीक और सत्ता में रहते हुए अपनाए गए राजनीतिक तौर-तरीकों को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि राज्य में भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार की कार्रवाई लगातार जारी है और इसका नतीजा यह है कि अब तक 400 से अधिक लोग जेल भेजे जा चुके हैं।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि कांग्रेस बार-बार जांच एजेंसियों और सरकार की मंशा पर सवाल उठाती रही है, लेकिन अब उसे यह तय करना चाहिए कि वह खुद को “छोटी मछली” मानती है या फिर “बड़ा मगरमच्छ”। सीएम के इस बयान को पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार और उसके शीर्ष नेतृत्व पर सीधा राजनीतिक हमला माना जा रहा है।
सीएम भजनलाल ने कहा कि पिछली सरकार के कार्यकाल में भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक, घोटाले और भ्रष्टाचार आम बात हो गई थी। लाखों युवाओं का भविष्य दांव पर लगा दिया गया और दोषियों को राजनीतिक संरक्षण मिला। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार ने भ्रष्टाचार खत्म करने के बड़े-बड़े दावे तो किए, लेकिन जमीनी हकीकत इसके ठीक उलट रही।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि उनकी सरकार सत्ता में आने के बाद से ही “जीरो टॉलरेंस नीति” पर काम कर रही है। चाहे मामला कितना ही प्रभावशाली व्यक्ति से जुड़ा क्यों न हो, कानून से ऊपर कोई नहीं है। उन्होंने कहा कि जांच एजेंसियां पूरी तरह स्वतंत्र हैं और सरकार किसी भी स्तर पर हस्तक्षेप नहीं कर रही।
सीएम भजनलाल शर्मा ने यह भी स्पष्ट किया कि युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि पेपर लीक और भर्ती घोटालों के खिलाफ की गई कार्रवाई सिर्फ शुरुआत है और आने वाले समय में और भी सख्त कदम उठाए जाएंगे।
मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद प्रदेश की राजनीति और गरमा गई है। कांग्रेस की ओर से भी पलटवार के संकेत मिल रहे हैं। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि भाजपा सरकार जनता का ध्यान महंगाई, बेरोजगारी और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों से हटाने के लिए भ्रष्टाचार का मुद्दा उछाल रही है। कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा राजनीतिक बदले की भावना से कार्रवाई कर रही है।
हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा सरकार भ्रष्टाचार और पेपर लीक जैसे मुद्दों को अपने सबसे मजबूत राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रही है। युवा मतदाता और मध्यम वर्ग इन मुद्दों पर बेहद संवेदनशील है और सरकार इस वर्ग को साधने की रणनीति पर काम कर रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार, सीएम भजनलाल शर्मा का यह बयान सिर्फ कांग्रेस पर हमला भर नहीं है, बल्कि आने वाले स्थानीय निकाय चुनावों और आगामी राजनीतिक रणनीति का संकेत भी देता है। भाजपा सरकार यह संदेश देना चाहती है कि वह सख्त फैसले लेने से पीछे नहीं हटेगी।
आगामी बजट से पहले स्वास्थ्य क्षेत्र को लेकर तेज हुई मांग, सामाजिक संगठनों ने राजस्थान सरकार से अधिक फंडिंग की अपील
जयपुर: राजस्थान में आगामी राज्य बजट को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं और इसी कड़ी में स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए अधिक बजट आवंटन की मांग जोर पकड़ने लगी है। प्रदेश के विभिन्न सामाजिक संगठनों, स्वास्थ्य विशेषज्ञों और जनसेवा से जुड़े समूहों ने राजस्थान सरकार से अपील की है कि आने वाले बजट में स्वास्थ्य सेवाओं को प्राथमिकता दी जाए और इस क्षेत्र के लिए पर्याप्त फंडिंग सुनिश्चित की जाए।
सामाजिक संगठनों का कहना है कि प्रदेश की आबादी लगातार बढ़ रही है, जबकि सरकारी स्वास्थ्य ढांचा अभी भी डॉक्टरों की कमी, संसाधनों के अभाव और सीमित बजट जैसी समस्याओं से जूझ रहा है। ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में स्थिति और भी चिंताजनक है, जहां आज भी कई प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर न तो पर्याप्त डॉक्टर उपलब्ध हैं और न ही जरूरी जांच सुविधाएं।
संगठनों ने मांग की है कि जिला अस्पतालों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC) को आधुनिक उपकरणों से लैस किया जाए। इसके साथ ही प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) की संख्या बढ़ाने और वहां 24 घंटे सेवाएं सुनिश्चित करने की आवश्यकता बताई गई है। उनका कहना है कि अगर प्राथमिक स्तर पर ही बेहतर इलाज उपलब्ध हो जाए, तो बड़े अस्पतालों पर दबाव अपने आप कम हो जाएगा।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि बजट में डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ और पैरामेडिकल कर्मियों की भर्ती के लिए अलग से प्रावधान होना चाहिए। वर्तमान में कई अस्पतालों में स्टाफ की भारी कमी है, जिससे मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल पाता। इससे न केवल मरीजों की परेशानी बढ़ती है, बल्कि सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर लोगों का भरोसा भी कमजोर होता है।
सामाजिक संगठनों ने मुफ्त दवा योजना, जांच सुविधाओं और जनस्वास्थ्य बीमा योजनाओं को और मजबूत करने की मांग भी की है। उनका कहना है कि महंगाई के इस दौर में गरीब और मध्यम वर्ग के लिए इलाज का खर्च लगातार बढ़ रहा है, ऐसे में सरकारी योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करना बेहद जरूरी है।
इसके अलावा, मानसिक स्वास्थ्य, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, पोषण और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों की रोकथाम और इलाज के लिए भी बजट में विशेष प्रावधान करने की मांग की गई है। संगठनों का मानना है कि सिर्फ इलाज पर ही नहीं, बल्कि रोकथाम और जागरूकता कार्यक्रमों पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए, ताकि बीमारियों को शुरुआती स्तर पर ही नियंत्रित किया जा सके।
संगठनों ने यह भी कहा कि कोविड-19 महामारी के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि एक मजबूत स्वास्थ्य प्रणाली कितनी जरूरी है। ऐसे में सरकार को स्वास्थ्य को केवल खर्च नहीं, बल्कि निवेश के रूप में देखना चाहिए। बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं न केवल लोगों की जीवन गुणवत्ता सुधारती हैं, बल्कि राज्य की आर्थिक प्रगति में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
कुल मिलाकर, सामाजिक संगठनों की मांग है कि आगामी राजस्थान बजट में स्वास्थ्य क्षेत्र को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए और पर्याप्त वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराए जाएं, ताकि प्रदेश के हर नागरिक को सुलभ, सस्ता और गुणवत्तापूर्ण इलाज मिल सके।
भाजपा को झटका: पूर्व मंत्री महेन्द्रजीत सिंह मालवीय ने पार्टी छोड़ी, कांग्रेस नेतृत्व से की मुलाक़ात
जयपुर: राजस्थान की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। राज्य के वरिष्ठ आदिवासी नेता और पूर्व मंत्री महेन्द्रजीत सिंह मालवीय ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) से इस्तीफा दे दिया है। भाजपा छोड़ने के तुरंत बाद उन्होंने कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व से मुलाक़ात की और पार्टी में वापसी की इच्छा जताई है। यह फैसला प्रदेश की सियासत में नए समीकरणों की ओर इशारा कर रहा है।
दो साल पहले थामा था भाजपा का दामनमहेन्द्रजीत सिंह मालवीय ने करीब दो वर्ष पहले कांग्रेस छोड़कर भाजपा जॉइन की थी। हालांकि, भाजपा में रहते हुए उन्हें अपेक्षित राजनीतिक संतोष नहीं मिला। उन्होंने पार्टी की नीतियों और कार्यशैली पर असहमति जताते हुए कहा कि वे अपने क्षेत्र और जनता के मुद्दों को प्रभावी ढंग से नहीं उठा पा रहे थे।
कांग्रेस नेतृत्व से अहम बैठकभाजपा से इस्तीफे के बाद मालवीय ने जयपुर में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली और पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेताओं से मुलाक़ात की। बैठक में उन्होंने स्पष्ट किया कि वे कांग्रेस के मूल्यों और विचारधारा में विश्वास रखते हैं और पार्टी में पुनः सक्रिय भूमिका निभाना चाहते हैं।
“भाजपा जॉइन करना मेरी राजनीतिक भूल”सूत्रों के अनुसार, मालवीय ने कांग्रेस नेतृत्व के समक्ष भाजपा में जाना अपनी “राजनीतिक भूल” बताया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस में रहते हुए उन्हें जनता के लिए काम करने की स्वतंत्रता और सम्मान मिलता था, जो भाजपा में नहीं मिला।
राजनीतिक सफर और प्रभावमहेन्द्रजीत सिंह मालवीय राजस्थान के आदिवासी बहुल वागड़ क्षेत्र के प्रभावशाली नेता माने जाते हैं। वे कई बार विधायक रह चुके हैं और राज्य सरकार में मंत्री पद भी संभाल चुके हैं। उनके इस फैसले से कांग्रेस को आदिवासी क्षेत्रों में मजबूती मिलने की संभावना है, जबकि भाजपा के लिए यह राजनीतिक झटका माना जा रहा है।
आगे क्या?कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक, मालवीय की पार्टी में औपचारिक वापसी को लेकर अनुशासन और संगठन स्तर पर प्रक्रिया पूरी की जाएगी। अंतिम निर्णय के बाद ही उनकी सदस्यता और भूमिका पर आधिकारिक घोषणा होगी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाक्रम आने वाले समय में राजस्थान की सियासत और चुनावी गणित पर असर डाल सकता है।
अमित शाह आज जयपुर में, 10 हजार पुलिस कांस्टेबलों को सौंपेंगे नियुक्ति पत्र
जयपुर | 10 जनवरी 2026
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह आज जयपुर दौरे पर हैं, जहां वे एक बड़े कार्यक्रम में राजस्थान पुलिस के 10,000 नव-नियुक्त कांस्टेबलों को नियुक्ति पत्र सौंपेंगे। यह कार्यक्रम राज्य सरकार के लिए बड़ी उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है, वहीं इसे लेकर राजनीतिक बयानबाज़ी भी तेज हो गई है।
बड़े पैमाने पर भर्ती, सरकार की उपलब्धिराज्य सरकार का दावा है कि यह कार्यक्रम राजस्थान पुलिस के इतिहास में सबसे बड़े नियुक्ति वितरण समारोहों में से एक है। सरकार का कहना है कि इससे न सिर्फ युवाओं को रोजगार मिला है, बल्कि राज्य की कानून-व्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और राज्य सरकार के कई मंत्री भी इस कार्यक्रम में मौजूद रहेंगे। सरकार इसे “युवाओं को रोजगार, राज्य को सुरक्षा” की दिशा में बड़ा कदम बता रही है।
अमित शाह का संदेशकेंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह अपने संबोधन में
पुलिस बल की भूमिका
आंतरिक सुरक्षा
युवाओं की भागीदारी
और केंद्र-राज्य समन्वय जैसे मुद्दों पर बात कर सकते हैं। माना जा रहा है कि वे राजस्थान पुलिस के आधुनिकीकरण और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी अहम संदेश देंगे।
विपक्ष का हमलाइस कार्यक्रम को लेकर कांग्रेस ने तीखा हमला बोला है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सवाल उठाते हुए कहा कि
“भर्तियों को राजनीतिक मंच बनाना गलत है। सरकार पहले कानून-व्यवस्था और लंबित मामलों पर जवाब दे।”
कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि सरकार रोजगार को राजनीतिक प्रचार का साधन बना रही है, जबकि कई विभागों में अब भी भर्तियां लंबित हैं।
सुरक्षा और ट्रैफिक व्यवस्थाअमित शाह के दौरे को देखते हुए जयपुर में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई है।
कार्यक्रम स्थल के आसपास अतिरिक्त पुलिस बल तैनात
ट्रैफिक डायवर्जन लागू
ड्रोन और सीसीटीवी से निगरानी
प्रशासन ने आम लोगों से ट्रैफिक निर्देशों का पालन करने की अपील की है।
राजनीतिक संकेत भी अहमराजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह कार्यक्रम सिर्फ नियुक्ति पत्र वितरण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके जरिए बीजेपी युवाओं और पुलिस वर्ग के बीच मजबूत संदेश देने की कोशिश कर रही है, खासकर आने वाले स्थानीय निकाय और पंचायत चुनावों को देखते हुए।